New Delhi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की। बैठक में CBSE की अकादमिक, परीक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक की जानकारी देते हुए प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ CBSE से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बैठक में CBSE की शैक्षणिक, परीक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई। इसमें अधिक दक्षता, पारदर्शिता और छात्रों व शिक्षकों को बेहतर सहयोग देने पर विशेष जोर दिया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर चर्चा और विवाद जारी है।
20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन भाषा नीति से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए थे। अदालत ने खास तौर पर पाठ्यपुस्तकों और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, छात्रों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ और विभिन्न स्कूलों में भाषा नीति लागू करने के तरीके पर सवाल किए थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना शामिल थे, CBSE की तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने योजना के तहत निर्धारित भारतीय भाषाओं के लिए शिक्षण सामग्री और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई। अदालत को यह भी बताया गया कि कुछ स्कूलों को अभी तक कुछ भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने सवाल उठाया कि बिना जरूरी अध्ययन सामग्री के छात्रों से नई भाषा सीखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
वहीं, CBSE और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि योजना में आंतरिक मूल्यांकन का प्रावधान है और अतिरिक्त भाषाओं में सफल नहीं होने पर कक्षा 9 के छात्रों को रोका नहीं जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो छात्र पहले से फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं, उन्हें उसे छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि पहले से पढ़ाई जा रही भाषाओं के बहिष्कार का कोई सवाल ही नहीं है और सभी भाषाओं के सम्मान पर जोर दिया।
अदालत ने विशेष रूप से संस्कृत जैसी भाषाओं के लिए शिक्षकों की उपलब्धता समेत नीति के व्यापक प्रशासनिक क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए।ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि 99.19 प्रतिशत CBSE स्कूलों में पहले से ही दो भारतीय भाषाएं पढ़ाने की व्यवस्था है, जबकि करीब 235 स्कूल अभी इस व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस नीति की संवैधानिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं से समीक्षा जरूरी है। इसमें भाषाओं का वर्गीकरण, शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था और छात्रों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ जैसे मुद्दे शामिल हैं।