उपभोग को बढ़ावा देने और रोजगार के मौके पैदा करने वाली सरकारी पहल के दम पर 2024 में रोजमर्रा के उपभोग के सामान (एफएमसीजी) सेक्टर की बढ़ोत्तरी दर सात से नौ प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। एफएमसीजी सेक्टर की जुझारू क्षमता और एडॉप्टबिलिटी मजबूत सरकारी समर्थन और डिजिटल बदलाव पहल के साथ मिलकर इसे अनिश्चितताओं से पार पाने और ज्यादा मजबूत होकर उभरने की अनुकूल स्थिति देती है।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘ भविष्य की ओर देखें तो भारत में एफएमसीजी सेक्टर निरंतर बढ़ोत्तरी के लिए तैयार है।
पूर्वानुमानों के मुताबिक, 2024 में इसमें सात से नौ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी।’’ हालांकि, इस सेक्टर को ‘‘ इन्फ्लेशन के दबाव, कंज्यूमर के भरोसे में कमी और मौजूदा बेरोजगारी दर’’ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ अब एफएफसीजी इंडस्ट्री का बढ़ता हुआ आर्थिक प्रभाव 9.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
भारत की आर्थिक बढ़ोत्तरी और रोजगार सृजन में इसकी अहम भूमिका है।’’ इसके अलावा, एफएफसीजी के लिए ऑनलाइन बिक्री माध्यम भी बढ़ रहे हैं....डी2सी (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) जैसे सेक्शन ‘‘तेजी से हो रहे डिजिटल बदलाव और विकसित होते कंज्यूमर खरीद व्यवहार’’ को दिखाते हैं।