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हाथरस में यौनशोषण के आरोप में फंसे प्रोफेसर को स्वैच्छिक सेवानिवृति

हाथरस, 12 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के हाथरस में यौन शोषण के आरोपों में घिरे बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर रजनीश कुमार को अदालत द्वारा सभी आरोपों से बरी किए जाने के बावजूद कॉलेज की प्रबंधन समिति ने उनके परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का आवेदन भी स्वीकार कर लिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन समिति की शनिवार को हुई बैठक के बाद रविवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। समिति ने बताया कि प्रोफेसर रजनीश कुमार द्वारा दिया गया वीआरएस आवेदन स्वीकार कर लिया गया है और उनके कॉलेज परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।

कॉलेज के संकाय सदस्य प्रोफेसर महावीर छोंकर ने बताया कि रजनीश कुमार ने स्वयं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का अनुरोध किया था, जिसे प्रबंधन ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि प्रवेश प्रतिबंध का निर्णय भी उसी बैठक में लिया गया और इसकी सूचना विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई।

वहीं, प्रोफेसर रजनीश कुमार के वकील वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने स्वेच्छा से वीआरएस का विकल्प चुना है, लेकिन कॉलेज में प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि वे इस आदेश की समीक्षा कर उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

गौरतलब है कि 24 मार्च को स्थानीय अदालत ने सबूतों के अभाव और कथित पीड़ितों के बयानों में पुष्टि न होने के आधार पर प्रोफेसर रजनीश कुमार को आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके और उन्हें फंसाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह मामला मार्च 2025 में एक छात्रा द्वारा महिला आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सामने आया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की थी और बाद में आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत