उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र वाला क्षेत्र भी है। उन्होंने राज्य में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्लास्टिक या किसी भी प्रकार का कचरा इधर-उधर न फैलाएं। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तीर्थ स्थलों, पवित्र नदियों और हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लगातार सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं।
केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच नगर पंचायत ने प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाए रखने में बड़ी सफलता हासिल की है। यात्रा के पहले ही सप्ताह में करीब 1,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र कर उसका निस्तारण किया गया है। साथ ही गीले कचरे के लिए स्थायी गड्ढे बनाने की योजना भी है।
22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे प्लास्टिक कचरा—खासतौर पर पानी की बोतलों—में वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए 3,000 वर्ग फीट क्षेत्र में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्थापित की गई है, जहां कचरे को 15 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, जैसे प्लास्टिक, कांच, धातु और कपड़ा।
यहां एक कंपैक्टर मशीन भी लगाई गई है, जो प्लास्टिक बोतलों को 30-40 किलोग्राम के बंडल में दबाकर तैयार करती है। नगर पंचायत के अनुसार, इस कचरे को बेचकर राजस्व भी प्राप्त किया जाएगा। सफाई व्यवस्था के लिए सुबह और शाम दो शिफ्ट में 55 सफाई कर्मी तैनात किए गए हैं, जबकि यात्रा मार्ग पर सफाई की जिम्मेदारी एक अन्य एजेंसी को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।