उत्तर प्रदेश में गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों का शिकार होने वाले बच्चों को समय पर विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया है। इसका लक्ष्य प्रदेश के करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल और कम लागत वाली एकीकृत ट्रॉमा केयर व्यवस्था तैयार करना है। इस व्यवस्था के तहत अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ डॉक्टरों और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सरकार के अनुसार, इससे हर साल करीब 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य है।
ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी
बाल ट्रॉमा के लिए यूनिफाइड इमरजेंसी केयर आर्किटेक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें गंभीर रूप से घायल बच्चे को दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ इलाज और आगे की देखभाल तक समयबद्ध और समन्वित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी करीब 3 से 5 प्रतिशत है। इसे एकीकृत ट्रॉमा केयर व्यवस्था के जरिए 12 से 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
173 ट्रॉमा और इमरजेंसी यूनिट विकसित होंगी
योजना के तहत प्रदेश में अलग-अलग स्तर की ट्रॉमा सुविधाओं का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसमें लेवल-1 की एक, लेवल-2 की 36 और लेवल-3 की 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट (ITEMU) विकसित करने की योजना है।
इस तरह कुल 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाएं तैयार होंगी और करीब 2,853 नए बेड जुड़ेंगे। इसका उद्देश्य गंभीर रूप से घायल बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार जल्द विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।
‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज पर फोकस
पीडियाट्रिक ट्रॉमा में दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इसके लिए दुर्घटना के बाद तत्काल रिस्पांस, प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उचित ट्रॉमा सेंटर तक तेजी से रेफरल की व्यवस्था को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे इलाज में होने वाली देरी और मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करने में मदद मिलेगी।
इस पूरी व्यवस्था को विकसित करने के लिए योगी सरकार करीब 45 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उद्देश्य बच्चों के ट्रॉमा मामलों में त्वरित उपचार और बेहतर समन्वित देखभाल के जरिए मृत्यु दर को कम करना है।