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Delhi: राजनयिक और कलाकार अभय कुमार की प्रदर्शनी, बौद्ध धर्म पर आधारित 'शून्यता'

राजनयिक अभय कुमार की रचनात्मकता नए रूप में सामने आई है। अभय कुमार ने कैनवस पर शून्य की तर्ज पर गोले बनाने शुरू किए। एक के बाद एक उन्होंने 60 गोले बना डाले। दिखने में सभी गोले शून्य जैसे हैं, फिर भी एक-दूसरे से अलग हैं।

दरअसल, शून्य के बारे में प्राचीन काल से दार्शनिकों, गणितज्ञों और धर्मगुरुओं की खास सोच रही है। अक्सर दार्शनिकों का मानना होता है कि शून्य का मतलब वजूद का नहीं होना नहीं, बल्कि शून्य में अनगिनत अस्तित्व का समाना है। शून्य में अस्तित्व और अस्तित्वहीनता- दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

‘शून्यता’ नाम से अभय कुमार के तस्वीरों की प्रदर्शनी शुक्रवार को राष्ट्रीय संग्रहालय में शुरू हुई है। उन्होंने शून्य के उस रूप के बारे में बताया, जो कभी बोधिसत्व अवलोकितेश्वर ने अपने शिष्य सारिपुत्र को बताया था। 

प्रदर्शनी में लगी तस्वीरें शून्यता में अस्तित्व का प्रतीक हैं। नजदीक से गोलों को देखने पर उनके भीतर उकेरी गई आकृतियां नजर आती हैं। गोलों से दूर जाने पर आकृतियां धूमिल होने लगती हैं और फिर दिखनी बंद हो जाती हैं।
 
गोलों के अंदर आकृतियां भी तरह-तरह की हैं। देवी-देवता, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी के अलावा अलग-अलग मिजाज की आकृतियां शामिल हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन करने आए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजनयिक की रचनात्मकता के इस रूप को बौद्ध धर्म से प्रेरित बताया। प्रदर्शनी आठ दिसंबर तक चलेगी।