उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने बाढ़ राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें तैनात की गई हैं।
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के मुताबिक प्रभावित लोगों तक भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
32 गांव बाढ़ से प्रभावित
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, 29 सितंबर की सुबह 8 बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 96 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर पहुंच गया था। वाल्मीकि नगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं।
16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय की हैं। इन शिविरों के जरिए प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर नजर रखी जा रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। बचाव कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर नावों की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 66 सदस्यीय स्थानीय गोताखोरों की टीम भी राहत और बचाव कार्य में लगी है।
13 हजार से ज्यादा लंच पैकेट बांटे
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 16 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनमें खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में 3 सामुदायिक रसोई शामिल हैं।
इन रसोइयों से प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दो मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति समेत संबंधित विभागों को भी राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय रखा गया है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता जल्द पहुंचाई जा सके।