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Chhattisgarh: सरकारी स्कूलों के रसोइयों का अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन, बोले- कैसे करें गुजारा?

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइयों का विरोध प्रदर्शन राजधानी रायपुर में 22वें दिन भी जारी रहा। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। इन हजारों रसोइयों की मांग है कि उन्हें मिलने वाली 66 रुपये की दिहाड़ी को बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया जाए।

आंदोलनकारियों में लगभग 95 फीसदी महिलाएं हैं, जिनमें से कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की हैं। इन रसोइयों का कहना है कि उनकी मेहनत से स्कूलों में पढ़ने वालों बच्चों को भोजन तो मिल रहा है, लेकिन उनके अपने परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

ये रसोइये सरकार की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना के मुख्य आधार हैं। योजना ये सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि वंचित परिवारों के बच्चे स्कूल जाना जारी रखें और माता-पिता के साथ कमाने के दबाव की वजह से पढ़ाई न छोड़ें।

कम दिहाड़ी में काम करने को मजबूर कई महिला रसोइया धुएं की वजह से सेहत पर होने वाले खराब असर को बयां करती हैं। वे बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में मिड-डे मील बनाने के लिए गैस सिलेंडर नहीं मिलते हैं और उन्हें अक्सर लकड़ी के चूल्हों का ही इस्तेमाल करना पड़ता है।

प्रदर्शन कर रहे रसोइयों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। वहीं बार-बार कोशिश करने के बावजूद राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका।