उत्तर प्रदेश का निर्यात बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2016-17 में प्रदेश का निर्यात 84,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी इस दौरान निर्यात मूल्य में करीब ढाई गुना बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश की इस बढ़ती निर्यात क्षमता में इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, खाद्य-डेयरी के साथ पारंपरिक कालीन उद्योग की भी अहम भूमिका है।
भदोही में आयोजित 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो यूपी के कालीन उद्योग की वैश्विक पहचान को मजबूत करने वाला बड़ा मंच बनकर सामने आया है। 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे इस एक्सपो में 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार और करीब 250 एग्जीबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं।
2017 के बाद तेज हुई निर्यात की रफ्तार
आंकड़ों के मुताबिक, 2012-17 के दौरान उत्तर प्रदेश के निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत थी। 2017 के बाद यह बढ़कर करीब 7.3 प्रतिशत हो गई। यानी निर्यात वृद्धि की रफ्तार करीब 1.8 गुना तेज हुई है। प्रदेश की निर्यात टोकरी में अब पारंपरिक उत्पादों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और खाद्य-डेयरी जैसे क्षेत्र भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।
भदोही के कालीन की दुनिया में मजबूत पहचान
उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग में संत रविदास नगर यानी भदोही की खास पहचान है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुल कालीन निर्यात में भदोही की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक रही। वहीं भदोही-मीरजापुर-वाराणसी का कालीन क्लस्टर मिलकर प्रदेश के करीब 88 प्रतिशत कालीन निर्यात में योगदान देता है।
भारत के हस्तनिर्मित कालीन निर्यात में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 55 से 60 प्रतिशत के बीच रही है। भदोही-मीरजापुर क्षेत्र इस कारोबार का प्रमुख केंद्र है। इस क्लस्टर से करीब 5,000 करोड़ रुपये का कालीन निर्यात अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में किया जा रहा है।
पांच लाख श्रमिकों और कारीगरों को रोजगार
कालीन उद्योग सिर्फ निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का भी आधार है। भदोही के कालीन उद्योग से करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े हैं।
ओडीओपी योजना, टूलकिट वितरण, मुद्रा लोन, आधुनिक लूम और सोलर लूम जैसी सुविधाओं से स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को लाभ मिला है। इससे उनकी आय और काम करने की परिस्थितियों में सुधार हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं के पलायन को भी रोकने में मदद मिली है।
बदली यूपी की एक्सपोर्ट बास्केट
प्रदेश की निर्यात टोकरी अब पहले से ज्यादा विविध हो गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत, इंजीनियरिंग की 20 प्रतिशत और खाद्य-डेयरी क्षेत्र की 11 प्रतिशत रही।
हस्तशिल्प निर्यात में भी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। देश के कुल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में यूपी की हिस्सेदारी 16.56 प्रतिशत है। ओडीओपी और निर्यात प्रोत्साहन नीति के जरिए पारंपरिक उत्पादों को नए बाजार और बेहतर ब्रांडिंग मिली है।
बेहतर कनेक्टिविटी, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जेवर एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से कारोबार को गति मिली है। इसके साथ ही निर्बाध बिजली और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार ने भी निर्यातकों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर किया है। आज उत्तर प्रदेश मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस कॉरिडोर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कारपेट एक्सपो मार्ट से सीधे ग्लोबल बाजार तक पहुंच
भदोही में 7.5 एकड़ में विकसित कारपेट एक्सपो मार्ट का उद्घाटन दिसंबर 2020 में हुआ था। यह अत्याधुनिक केंद्र कालीन कारोबारियों को देश-विदेश के खरीदारों से सीधे जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इसी कड़ी में 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक भदोही में 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो आयोजित किया जा रहा है। इसमें करीब 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हो रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार भी हैं। भदोही का यह एक्सपो स्थानीय कारीगरों के हुनर और यूपी के कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है।