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जैसलमेर में अनूठी है 'गणगौर उत्सव' की परंपरा, अकेले होती है देवी गौरी की आराधना

Rajasthan: राजस्थान के ऐतिहासिक शहर जैसलमेर में, हर साल हिंदू पंचांग के चैत्र महीने में एक अनोखी परंपरा जीवंत हो उठती है। देवी पार्वती और भगवान शिव को समर्पित 'गणगौर' उत्सव यहाँ खास स्थानीय अंदाज में मनाया जाता है।

जैसलमेर में माता पार्वती को देवी गौरी के नाम से जाना जाता है और यहां उनकी पूजा भगवान शिव के साथ नहीं बल्कि अकेले की जाती है। लोककथाओं के मुताबिक, शहर में ईसर के नाम से जाने जाने वाले भगवान शिव की प्रतिमा को लगभग 400 साल पहले बीकानेर के लोग जबरदस्ती ले गए थे।

तब से लेकर अब तक, इस शहर के लोग सिर्फ देवी गौरी की ही आराधना करते आ रहे हैं। साथ ही, वे इस उम्मीद को भी संजोए हुए हैं कि एक दिन 'ईसर' की प्रतिमा अपने सही स्थान पर जरूर वापस लौटेगी।

इतिहासकारों का मानना ​​है कि देवी गौरी की पूजा उनके पति के बिना किए जाने की वजह शहर की वो परंपरा है, जिसके मुताबिक जैसलमेर में जब पति अपनी पत्नियों को छोड़कर चले जाते हैं, तो वे दोबारा विवाह नहीं करतीं।

जैसलमेर के लोगों के लिए गणगौर महज एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है। वे न सिर्फ इस खास परंपरा का जश्न मनाते हैं, बल्कि इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजो रहे हैं।