मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्राविधानों के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और सरकारी खर्च की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त होने वाली है, इसलिए जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए।
रविवार शाम वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी हों और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित किया जाए। बैठक में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों की वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।
बजट का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं है, बल्कि उसका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित कर उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को विभागीय मंत्रियों के साथ नियमित और बिंदुवार समीक्षा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी कारणों से वित्तीय स्वीकृतियों अथवा व्यय में अड़चन आ रही है, उनका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग को भी इसकी नियमित निगरानी करने और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
पात्र किसानों को केसीसी से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ मिलना चाहिए।
इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराने के निर्देश दिए गए, ताकि पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने को भी कहा गया।
जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने के लिए एमएसएमई विभाग को प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयबद्धता से समझौता नहीं किया जाएगा। काम में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लिए समन्वय के निर्देश
केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि मिलनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए। विभागीय मंत्रियों को संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े मामलों का समाधान कराने के निर्देश दिए गए, ताकि केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति प्रभावित न हो।
9.99 लाख करोड़ रुपये का है यूपी का बजट
समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का कुल बजट 9,99,056.48 करोड़ रुपये है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 1,58,474.15 करोड़ रुपये अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए 5,01,957.09 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
अब तक शासन स्तर से 5,15,918.44 करोड़ रुपये यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित 2.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक 2,83,870.11 करोड़ रुपये का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।
प्रमुख विभागों की वित्तीय प्रगति की समीक्षा
विभागवार समीक्षा में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने बजट व्यय के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। विभाग ने बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया है। ऊर्जा विभाग में 73,348.56 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 41,541.93 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में 82,245.68 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 65,982.04 करोड़ रुपये यानी 80.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हुई हैं और 31,718.92 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है।
गृह विभाग में 43,891.37 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 40,502.28 करोड़ रुपये यानी 92.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं और 14,712.68 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है।
लोक निर्माण विभाग में 45,270.69 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 27,375.91 करोड़ रुपये यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हुई हैं और 14,178.60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 39,906.52 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष 25,557.48 करोड़ रुपये यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं और 10,286.50 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए, ताकि धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उसका बेहतर उपयोग हो सके।
फील्ड में जाकर विकास कार्यों की समीक्षा करें अधिकारी
मुख्यमंत्री ने विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराया जाए।
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में सभी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।