Breaking News

असम एग्जिट पोल: NDA को 102 सीटें, कांग्रेस गठबंधन को 23 सीटें मिलने का अनुमान     |   गृहमंत्री अमित शाह लेह पहुंचे; लद्दाख के उपराज्यपाल और सांसद ने उनका स्वागत किया     |   पंजाब बीजेपी 1 मई को चंडीगढ़ में ‘जनता दी विधानसभा’ आयोजित करेगी     |   ब्रह्मोस एयरोस्पेस का रिवेन्यू FY2025-26 के लिए ₹5200 करोड़ के पार पहुंचा: DRDO     |   '226 सीटों का आंकड़ा पार करेंगे', ममता ने बंगाल में टीएमसी की जीत का दावा किया     |  

धर्म गद्दी और राज गद्दी के संबंध पर अनंत विभूषित महाराज का बड़ा बयान

29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन भक्ति भाव के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से अनेक साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद”। इस विषय पर सभी संतों ने अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर अनंत विभूषित श्री करौली शंकर महादेव जी भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में महाराज ने कहा कि देश में दो व्यवस्थाएं रही हैं—एक धर्म गद्दी और दूसरी राज गद्दी, और दोनों एक-दूसरे की पूरक रही हैं। धर्म गद्दी का संदेश राज गद्दी के माध्यम से पूरे समाज में फैलता था। 

समाज की कुरीतियों और अव्यवस्थाओं को समाप्त करने तथा सही दिशा देने का कार्य धर्म गद्दी करती थी। वह मूल मंत्र देती थी, नीतियां निर्धारित करती थी, और राजा उन नीतियों का पालन करता था—यही परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

उन्होंने आगे कहा कि आज भी कई स्थानों पर धर्म गद्दियां प्रभावी हैं, लेकिन लगभग 90 प्रतिशत मामलों में धर्म गद्दियों का जो अधिकार और राज गद्दी पर उनका जो नियंत्रण था, वह कमजोर पड़ गया है और कहीं न कहीं चाटुकारिता में बदल गया है।

महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज स्थिति यह है कि नीतिगत बात कहने का साहस बहुत कम लोगों में रह गया है। यदि धर्म गद्दियां साहस के साथ नीति और धर्म की बात करें, एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं, तो निश्चित रूप से राज गद्दी को उसका पालन करना पड़ेगा, क्योंकि आज भी जनमानस में संतों का सम्मान बना हुआ है।

उन्होंने इसे एक कड़वी लेकिन सच्ची बात बताते हुए कहा कि आज समाज में सच बोलने से लोग कतराते हैं। यह चिंताजनक है, क्योंकि लोगों ने मानो आंखें बंद कर ली हैं, यह सोचकर कि कड़वी बात कहने से वे बुरे बन जाएंगे। जबकि सत्य और असत्य, उचित और अनुचित में भेद करना ही हमारा कर्तव्य है।

अंत में उन्होंने कहा कि समाज के मार्गदर्शन के लिए आवश्यक है कि धर्म और नीति के पक्ष में निडर होकर बात की जाए, तभी एक सशक्त और संतुलित व्यवस्था का निर्माण संभव हो सकेगा।