वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू हुआ उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) प्रदेश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक विरासत, निवेश, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को देश-दुनिया के सामने लाने का मंच बन चुका है। यूपीआईटीएस-2026 के समापन कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि “यूपी डिड इट”, यानी उत्तर प्रदेश ने कर दिखाया।
कारीगरों को मिला बाजार और ग्राहकों की पसंद समझने का मौका
प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपीआईटीएस में प्रदेश के कारीगरों को सिर्फ अपने उत्पाद बेचने का अवसर नहीं मिला, बल्कि देश-विदेश से आए खरीदारों से सीधे ग्राहक प्रतिक्रिया और बाजार की जानकारी भी मिली। इससे कारीगर अपने डिजाइन और उत्पादों को ग्राहकों की जरूरत के अनुसार बेहतर कर सकेंगे और स्थानीय बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की दिशा में बढ़ सकेंगे।
आयोजन में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। उन्हें स्वरोजगार योजनाओं के साथ मशीनों के इस्तेमाल और व्यवसाय संचालन की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने और निर्यातकों को नए देशों व नए उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं के बारे में बताया।
ओडीओसी से सामने आई यूपी की पाक विरासत
शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश को खुद को जानने और देश-दुनिया को प्रदेश के बारे में बताने का अवसर दिया। एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी) के जरिए प्रदेश के ऐसे पारंपरिक व्यंजन सामने आए, जिनके बारे में कई लोगों को पहली बार जानकारी मिली। इससे उत्तर प्रदेश की सदियों पुरानी पाक और सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के खरीदारों और प्रतिनिधिमंडलों तक पहुंचाने का अवसर मिला।
एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल पर जोर
एआई के इस्तेमाल पर प्रमुख सचिव ने कहा कि मानव ने पहले शारीरिक श्रम और फिर कई दूसरे काम मशीनों को सौंपे और अब सोचने की प्रक्रिया में भी एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उन्होंने इसके संतुलित उपयोग की जरूरत बताई।
उन्होंने बताया कि सीएम युवा योजना के तहत मुजफ्फरनगर और बदायूं के तीन युवा उद्यमियों को एआई आधारित बिक्री सेवा से जोड़कर इसका व्यावहारिक परीक्षण शुरू कराया गया है। इससे यह देखा जाएगा कि एआई उनकी बिक्री और कारोबार बढ़ाने में कितनी मदद करता है।
उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ रहा यूपीआईटीएस
कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि यूपीआईटीएस के चार संस्करणों के जरिए उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने रखा गया है। साथ ही प्रदेश के उद्यमियों और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने का काम हुआ है। उन्होंने कहा कि आयोजन में उत्पादों की बिक्री के साथ उद्यमियों को ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग और उत्पादों में जरूरी बदलाव की जानकारी भी मिली। इससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में युवाओं और नए उद्यमियों को स्वरोजगार, उद्योग संचालन और तकनीक के जरिए कारोबार बढ़ाने की जानकारी मिली। तकनीकी सत्रों और विशेषज्ञों के संवाद से निर्यात और कारोबार बढ़ाने के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई।
सीएम योगी ने लगातार की समीक्षा बैठकें
इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के चेयरमैन राकेश कुमार ने कहा कि यूपीआईटीएस प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को देश-दुनिया के खरीदारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण की सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशन की भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कीं और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
राकेश कुमार ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और प्रदेश के मंत्रियों भूपेंद्र चौधरी, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ तथा राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की वस्त्र और हस्तशिल्प परंपरा प्रदेश की पहचान के साथ लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना ने स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया है।
राकेश कुमार ने वस्त्र क्षेत्र में हो रहे प्रयासों और ‘भारत टेक्स’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ विजन के अनुरूप भारत का वस्त्र उद्योग उत्पादन से निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, हस्तशिल्प और उद्यमिता क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।