उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर युवाओं और नए उद्यमियों को रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र से जोड़ने का काम कर रहा है। इसका एक उदाहरण डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के सह-संस्थापक और उप प्रबंध निदेशक तन्मय तिवारी की कहानी है। यूके से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटे तन्मय ने एक बीएचके फ्लैट से अपना कारोबार शुरू किया। आज उनकी कंपनी रक्षा क्षेत्र के लिए उन्नत और हल्के कंपोजिट उपकरण तैयार कर रही है।
तन्मय तिवारी ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में यूपीडा के विशेष सत्र के दौरान अपनी कारोबारी यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में करीब पांच साल बिताए और वहीं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।
डिफेंस एक्सपो के बाद भारत में कारोबार शुरू करने का फैसला
तन्मय ने बताया कि 2020 में लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो के दौरान उन्हें भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र को करीब से समझने का मौका मिला। एक्सपो में पांच दिन बिताने के बाद उन्होंने तय किया कि कंपनी की शुरुआत यूके के बजाय भारत में ही की जाएगी।
2021 में परास्नातक की थीसिस पूरी करने के बाद वह भारत लौटे और डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स की शुरुआत की। कंपनी का शुरुआती काम एक बीएचके फ्लैट से शुरू हुआ। शुरुआत में कंपनी ने नागरिक क्षेत्र पर ध्यान दिया और कृषि ड्रोन, ऑटोमोबाइल और हाई-एंड सुपरबाइक्स में इस्तेमाल होने वाले कार्बन फाइबर और ग्लास फाइबर के कंपोजिट पुर्जे तैयार किए।
IIT कानपुर की टेस्टिंग से रक्षा क्षेत्र में मिला रास्ता
तन्मय ने बताया कि कंपनी ने आईआईटी कानपुर के संपर्क में आकर अपने कंपोजिट नमूने और टेस्टिंग कूपन जांच के लिए भेजे। परीक्षण के बाद यह पुष्टि हुई कि कंपनी के उत्पाद रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल के जरूरी मानकों को पूरा करने में सक्षम हैं।
इसके बाद कंपनी ने रक्षा क्षेत्र के लिए उत्पादन शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाई। छोटे शेड से शुरू हुई कंपनी आज कानपुर में करीब 20 हजार वर्गफुट की फैक्ट्री से संचालित हो रही है। कंपनी में करीब 40 लोगों की टीम काम कर रही है।
कंपनी AS 9100 प्रमाणित है, जो एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़ा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है। यह प्रमाणन ब्यूरो वेरिटास की ओर से किया गया है।
अब लखनऊ में बनेगी नई अत्याधुनिक इकाई
तन्मय ने बताया कि कंपनी अब भारतीय रक्षा इकोसिस्टम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में काम कर रही अन्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही है। कंपनी विमान के ढांचे के निर्माण और हल्के आयुध से जुड़े प्रोजेक्ट में भी योगदान दे रही है।
अब कंपनी लखनऊ नोड में एक नई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और विनिर्माण सुविधा स्थापित करने जा रही है। इस नई इकाई का निर्मित क्षेत्र करीब 70 से 80 हजार वर्गफुट होगा, जो कंपनी की मौजूदा फैक्ट्री से लगभग चार गुना बड़ा है। नई इकाई से करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष और 1,500 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।
निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी
तन्मय तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में नई इकाई के लिए किए जाने वाले पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा विदेश से आयात होने वाले उपकरणों पर परिवहन संबंधी सब्सिडी और पेटेंट व ट्रेडमार्क के लिए प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि इन नीतिगत प्रोत्साहनों और सरकार के सहयोग से युवा उद्यमियों के लिए रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रवेश और विस्तार के नए अवसर तैयार हुए हैं।
तन्मय ने कहा कि एक छोटे बीएचके फ्लैट से शुरू हुई कंपनी का हजारों वर्गफुट की अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई की ओर बढ़ना नई तकनीक, युवा प्रतिभा और औद्योगिक सहयोग के साथ उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण के विस्तार का उदाहरण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिले सहयोग के लिए प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों का आभार जताया।