Stock Market: मौद्रिक नीति घोषणाओं के बीच शेयर बाजारों में शुक्रवार को मुनाफावसूली होने से गिरावट आई और मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 117 अंक टूट गया जबकि एनएसई निफ्टी 49.85 अंक नुकसान में रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाने और महंगाई का अनुमान बढ़ाने के बीच मुनाफावसूली होने से बाजार नुकसान में रहा।
साथ ही विदेशी पूंजी की निकासी और एशिया के अन्य बाजारों में कमजोर रुख से बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 74,243.34 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 74,717.57 और नीचे में 73,988.75 अंक तक गया। इस तरह सेंसेक्स में कुल 728.82 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया। वहीं, एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ।
आरबीआई ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में समस्या के कारण वृद्धि और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से ट्रेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, एक्सिस बैंक, अडाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल हैं।
आरबीआई ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत जबकि खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया।
व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सूचकांक 0.24 प्रतिशत की गिरावट में रहा जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप सूचकांक 0.29 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कुल 2,138 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए जबकि 2,056 शेयरों में तेजी रही और 205 अन्य अपरिवर्तित रहे। क्षेत्रवार सूचकांकों में धातु खंड में 1.62 प्रतिशत, दूरसंचार खंड में 1.52 प्रतिशत, जिंस खंड में 0.95 प्रतिशत और आईटी खंड में 0.83 प्रतिशत की गिरावट रही।
साप्ताहिक आधार पर बीएसई सेंसेक्स में कुल 532.4 अंक यानी 0.71 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी में 181.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने घोषणा की है कि वह एक अप्रैल, 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले पात्र विदेशी निवेशकों के लिए ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट देगी।
वहीं आरबीआई ने बिना पाबंदी वाले विदेशी निवेश मार्ग के तहत उपलब्ध सरकारी बॉन्ड के दायरे को बढ़ाया है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी ऋण जुटाने वाली सरकारी कंपनियों के लिए रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली की भी घोषणा की। वह प्रवासी भारतीयों से डॉलर प्रवाह को आकर्षित करने के लिए 30 सितंबर तक तीन से पांच साल की अवधि के नए एफसीएनआर (बी) जमा पर जोखिम कम करने को लेकर लागत को वहन करेगा। इन उपायों का उद्देश्य रुपये को मजबूत करना है।
रुपया इस वर्ष पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की रिकॉर्ड पूंजी निकासी के चलते छह प्रतिशत से अधिक टूटा है। इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.11 प्रतिशत कमजोर होकर 94.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोप के प्रमुख बाजारों में ज्यादातर में तेजी का रुख था। अमेरिकी बाजार में ज्यादातर गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
शेयर बाजारों के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 4,447.06 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। सेंसेक्स गुरुवार को मामूली 13.84 अंक नुकसान में रहा था जबकि निफ्टी में 10.95 अंक की गिरावट रही थी।