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संत संसद 2026: साध्वी हरि प्रिया आनंद ने बताया राष्ट्रवाद का असली मतलब, बताई 'ॐ' की शक्ति

नेटवर्क10 न्यूज चैनल ने 29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस आयोजन में देशभर से कई संतों ने भाग लिया और सनातन धर्म, उसके महत्व तथा समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद”। इस विषय पर सभी संतों ने अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, भाईचारे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।

इस विशेष कार्यक्रम में उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा से साध्वी हरि प्रिया आनंद भी उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि हमें एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना है, तो इसके लिए आध्यात्मिक क्रांति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस आध्यात्मिक क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी संत होते हैं, जो मनुष्य और परमात्मा के बीच सेतु का कार्य करते हैं। संत ही लोगों को ईश्वर से जोड़ने का मार्ग दिखाते हैं।

साध्वी ने आगे कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। उन्होंने ‘ॐ’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी उत्पत्ति से ही सृष्टि का संचार हुआ है।

‘नाद ब्रह्म’ के रूप में ‘ॐ’ ही सृष्टि के सृजन और अंत दोनों का आधार है। इसलिए हमें मूल तत्व को पहचानना होगा और अपनी नींव को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि नींव मजबूत होगी, तो इमारत भी सुदृढ़ बनेगी और वृक्ष भी स्वस्थ रूप से विकसित होगा।

अंत में उन्होंने आह्वान किया कि ‘ॐ’ की साधना को समाज के हर वर्ग, विशेषकर बच्चों तक पहुंचाया जाए, ताकि एक मजबूत, जागरूक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके।