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‘संत संसद 2026’: महेश योगी जी महाराज ने कहा "राम मंदिर ने सरकार को ₹400 करोड़ टैक्स दिया"

29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन भक्ति भाव के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से अनेक साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद”। इस विषय पर सभी संतों ने अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर श्री महंत महामंडलेश्वर डॉ स्वामी महेश योगी जी महाराज भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भव्य निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंदिर के निर्माण में प्रत्येक सनातनी भाई-बहन ने अपना योगदान और समर्पण दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्माण आस्था और जनसहभागिता का प्रतीक है।

उन्होंने राम जन्मभूमि से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए कार्यों से सरकार को कर (टैक्स) प्राप्त हो रहा है, तो सरकार को भी धर्म और समाज के हित में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट यदि चाहे तो अयोध्या के 400 गांवों को गोद लेकर प्रत्येक गांव के विकास पर वार्षिक एक करोड़ रुपये खर्च कर सकता है, जिससे वहां स्कूल और गुरुकुल जैसे शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए जा सकते हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने कश्मीर, पश्चिम बंगाल और केरल की वर्तमान परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के कई क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन और सामाजिक संरचना में बदलाव देखने को मिल रहा है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

महेश योगी जी महाराज ने कहा कि भारत को प्राचीन ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा ने ‘विश्व गुरु’ और ‘सोने की चिड़िया’ बनाया था, लेकिन वर्तमान समय में उस विरासत को पुनः सशक्त करने की जरूरत है।

कार्यक्रम के आयोजन को सराहते हुए उन्होंने नेटवर्क10 न्यूज चैनल की पहल की प्रशंसा की और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में जागरूकता और विचारों का आदान-प्रदान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए गहन योजना और संसाधनों का उपयोग किया गया है, उसी तरह देश की वर्तमान चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।