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'संत संसद 2026': महामंडलेश्वर भूपेन्द्र गिरि का संदेश-संतों के समागम से बहेगी समरसता की गंगा!

नेटवर्क10 न्यूज़ चैनल ने 29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ का भव्य आयोजन किया, जिसमें देशभर से अनेक संतों ने भाग लेकर सनातन धर्म, उसके महत्व और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की।

इस विशेष कार्यक्रम में महामंडलेश्वर भूपेन्द्र गिरि जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि व्यक्तियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज इस संत संसद में बड़े-बड़े विद्वान, क्रांतिकारी संत और बांके बिहारी के भक्त एक साथ उपस्थित हैं, और इस संगम का प्रभाव पूरे विश्व तक जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि सभी संतों का उद्देश्य पूरे विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से एक सूत्र में पिरोना है। इस दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा, “तुलसी सावन सुखाए, गाथा रघुनाथ की,” और बताया कि संतों की वाणी का प्रभाव दूर-दूर तक पहुंचता है।

महामंडलेश्वर जी ने संत समागम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों के कंठ में सरस्वती और उनकी जिह्वा पर गंगा का वास होता है। उनके प्रत्येक वचन से अमृत की धारा प्रवाहित होती है, जो समाज को दिशा और प्रेरणा प्रदान करती है। अंत में उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल देश, बल्कि पूरे विश्व में शांति, एकता और मानवीय मूल्यों का संदेश प्रसारित होता है।