मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही समाज की सुरक्षा और मजबूती है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी का कल्याण सनातन धर्म की मजबूती से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ लोग एक स्वर में अपनी एकता दिखाएंगे तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती।
मुख्यमंत्री योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
रामभक्तों को भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन परंपरा के वैभव को लेकर अलग-अलग तरह के दावे और भ्रम फैलाने के प्रयास हो सकते हैं। उन्होंने रामभक्तों से ऐसे भ्रम फैलाने वालों को पहचानने की बात कही। इसके लिए उन्होंने हनुमान जी और कालनेमि के प्रसंग का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे। उनके अनुसार संपूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी जरूरी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ का मानना था कि यदि सोमनाथ मंदिर का पुनर्प्राण-प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए।
राम मंदिर आंदोलन में महंत दिग्विजयनाथ की भूमिका का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों के लिए गौरव का विषय है।
काशी, अयोध्या और विंध्यवासिनी धाम का किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने आया है। प्रयागराज महाकुंभ ने भी दुनिया के सामने सनातन परंपरा की व्यापकता और सामर्थ्य को प्रदर्शित किया। उन्होंने वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। उन्होंने कहा कि अपनी-अपनी परंपराओं का पालन करते हुए सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना जरूरी है।
दोनों आचार्यों के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने जिन उद्देश्यों के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उनके दूरदर्शी कार्यों ने भविष्य के लिए मजबूत नींव तैयार की। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।
1932 में रखी शिक्षा की नींव
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में संसाधनों की कमी और गुलामी के दौर में महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म की भावना थी।
उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में महंत दिग्विजयनाथ की भूमिका का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र समेत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं।
सीएम योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस समय बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।
गोरक्षपीठ में जाति-पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होने के बावजूद पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक साथ भोजन करते हैं और आचार्यों व संतों को समान सम्मान दिया जाता है।
संतों और वक्ताओं ने भी योगदान को याद किया
अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा के क्षेत्र में योगदान को याद किया। काशी से आए जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग खुले।
महायोगी गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज बड़े स्वरूप में विकसित हो चुका है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक ‘श्री हनुमत् कथा पूजनम्’ का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संतों ने विमोचन किया। कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ समेत अन्य संत मौजूद रहे।