Breaking News

नवरात्रि पर अंबाला के दुखभंजनी मंदिर में मां काली का 300 किलो दूध से अभिषेक, विजयवाड़ा में मां अन्नपूर्णा के दर्शन

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को हरियाणा के अंबाला शहर स्थित दुखभंजनी मंदिर में मां काली की प्रतिमा का करीब 300 किलोग्राम दूध से अभिषेक किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित श्री कनक दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा को श्री अन्नपूर्णा देवी के स्वरूप में सजाया गया।

दुखभंजनी मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन मां काली का दूध से अभिषेक करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह दिन मां चंद्रघंटा की आराधना को समर्पित है। मान्यता है कि सच्चे मन से इस अनुष्ठान में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मंदिर के पुजारी पंकज वशिष्ठ ने बताया कि मां को जो भी अर्पित किया जाता है, मां उसे कई गुना करके वापस देती हैं। दूध चढ़ाने के पीछे मान्यता है कि भक्तों के घरों में अन्न, धन और समृद्धि बनी रहे।

मां काली के अभिषेक में इस्तेमाल किए गए दूध में से कुछ श्रद्धालुओं को चरणामृत के रूप में दिया गया। बाकी दूध से खीर का प्रसाद तैयार किया गया। इसके अलावा सामूहिक भंडारे में कढ़ी-चावल परोसने के लिए दही भी तैयार किया गया। मंदिर की ओर से मंगलवार शाम को शहर में मां की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद बुधवार को ताजपोशी यानी राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा। पुजारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को मंदिर परिसर में विशेष डांडिया उत्सव भी होगा।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में इंद्रकीलाद्रि पहाड़ी पर स्थित श्री कनक दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन मां कनक दुर्गा को श्री अन्नपूर्णा देवी के रूप में सजाया गया। मां अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। इस स्वरूप में देवी के हाथों में अन्न से भरा पात्र और करछुल दर्शाए जाते हैं, जो सभी जीवों को भोजन उपलब्ध कराने का प्रतीक हैं। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, भरपूर अन्न और भूख से मुक्ति की कामना की।

मंदिर में हर साल आयोजित होने वाले दशहरा उत्सव में आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और गरबा व डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्यों में भाग लेते हैं। देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।