उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों की शुरुआती शिक्षा को खेल और गतिविधियों से जोड़ने के लिए नई पहल की है। पीएम श्री योजना के तहत वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में ‘लर्निंग कॉर्नर’ विकसित किए जाएंगे। इसके लिए 193 लाख रुपये की धनराशि मंजूर की गई है। प्रत्येक विद्यालय को 20 हजार रुपये की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
इन बालवाटिकाओं में बच्चों की उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुसार चार तरह के लर्निंग कॉर्नर बनाए जाएंगे। इनमें रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर शामिल हैं। इनकी मदद से बच्चों को किताबों, खिलौनों, कला, अभिनय और अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा।
खेल और गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था में गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। लर्निंग कॉर्नर बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक, संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास के साथ सूक्ष्म मांसपेशियों के विकास में भी मदद करेंगे।
3 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए आयु के अनुसार अलग-अलग शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को खेल-खेल में सीखने के लिए सहज और रोचक वातावरण देना है।
कहानी की किताबों से पजल और ब्लॉक्स तक
रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की किताबें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट और लेखन-चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री रखी जाएगी। इससे बच्चों में शब्दावली, सुनने और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा।
ब्लॉक कॉर्नर में फोम और लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट और नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज तथा लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री उपलब्ध होगी। इनके जरिए बच्चों में आकार पहचान, समस्या समाधान, स्थानिक समझ और शुरुआती संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी।
परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से बढ़ेगी रचनात्मकता
परफॉर्मेंस कॉर्नर में ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, छोटा ड्रम, हैट्स, स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री रखी जाएगी। इनके जरिए बच्चों को भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद और सामाजिक सहभागिता जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
वहीं आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट और कलर पेपर उपलब्ध होंगे। इससे बच्चों को अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने और सूक्ष्म मोटर कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग सामग्री
लर्निंग कॉर्नर में सामग्री का चयन बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। 5-6 वर्ष के बच्चों के रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स और द्विभाषी पुस्तकों का भी प्रावधान किया गया है।
स्कूल स्तर पर होगी खरीद, गुणवत्ता की निगरानी
लर्निंग कॉर्नर के लिए आवश्यक सामग्री की खरीद स्कूल स्तर पर की जाएगी। वहीं जिला और खंड स्तर से सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्धता और उपयोगिता की निगरानी की जाएगी, ताकि बच्चों को निर्धारित गतिविधियों का प्रभावी लाभ मिल सके।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि बालवाटिका में सीखना बच्चों के लिए जितना सहज और आनंददायक होगा, उनकी बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होने से बच्चों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि लर्निंग कॉर्नर में आयु वर्ग के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को उनकी विकासात्मक जरूरतों के मुताबिक सीखने के अवसर मिलें। उन्होंने सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की बात कही।