केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राज्य विधानसभा को ये निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई (एम) विधायक डी. के. मुरली की शिकायत पर सदन की आचार समिति द्वारा कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल मामकूटत्तिल के खिलाफ कार्यवाही रोकने संबंधी अभ्यावेदन पर विचार करे। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का निर्देश देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की पीठ ने कहा कि एक अधिवक्ता द्वारा दायर यह याचिका विचारणीय नहीं है, क्योंकि न्यायालय विधानसभा अध्यक्ष को यह निर्देश नहीं दे सकता कि सदन की कार्यवाही किस प्रकार संचालित की जाए। अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है। याचिकाकर्ता कुलातूर जयसिंह ने कहा कि मुरली ने मामकूटत्तिल के विधायक के रूप में कथित अनुचित आचरण के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी और इस मुद्दे को सदन में उठाने की अनुमति मांगी थी।
अधिवक्ता एम. आर. सरीन के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया कि यह शिकायत “राजनीतिक कारणों से दुर्भावनापूर्ण मंशा” से दर्ज कराई गई थी। याचिका में कहा गया, ‘‘केरल विधानसभा अध्यक्ष ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की समीक्षा किए बिना ही उसे जांच के लिए आचार समिति को भेज दिया।’’ इसमें ये भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अध्यक्ष को एक अभ्यावेदन भेजकर पलक्कड़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मामकूटत्तिल के खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध किया था।
याचिकाकर्ता ने विधानसभा अध्यक्ष को अपने अनुरोध के बारे में पुन: याद दिलाया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए, सिंह को मजबूर होकर उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा और उन्होंने आचार समिति को यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि वह पलक्कड़ के विधायक के खिलाफ कार्यवाही वापस लेने संबंधी उनके अभ्यावेदन पर विचार करे। मामकूटत्तिल तीन अलग-अलग महिलाओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित तीन मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं और फिलहाल सभी मामलों में जमानत पर हैं।
केरल हाईकोर्ट ने राहुल मामकूटत्तिल मामले में दखल से किया इनकार, PIL खारिज
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