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यूपी में पुलिस से अदालत तक एक क्लिक पर जुड़ेगी न्याय व्यवस्था, योगी सरकार का डिजिटल प्लान तैयार

उत्तर प्रदेश में अपराध की जांच से लेकर अदालत में फैसले तक की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत पुलिस थानों, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, अभियोजन विभाग, जेलों और न्यायालयों को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) को मजबूत किया जा रहा है। इससे अपराध की जांच से जुड़े दस्तावेज और जरूरी जानकारियां अलग-अलग विभागों के बीच आसानी से साझा हो सकेंगी।

नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में यूपी का स्कोर बढ़ा

नए आपराधिक कानूनों (एनसीएल) के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 12 सितंबर 2026 के एनसीएल रैंकिंग डैशबोर्ड के अनुसार, प्रदेश का स्कोर बढ़कर 85.99 अंक हो गया है। 25 जून को यह 78.13 अंक था। यानी इस दौरान 7.86 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

डैशबोर्ड के मुताबिक, नोटिफिकेशन जारी करने और मॉडल रूल्स लागू करने में प्रदेश को पूरे 10-10 अंक मिले हैं। आईसीजेएस इंटीग्रेशन और MedLEaPR पोर्टल के क्रियान्वयन में भी 10-10 अंक हासिल हुए हैं। वहीं, नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के इस्तेमाल में पांच में से पांच अंक मिले हैं।

ई-साक्ष्य में 10 में से 6.57 अंक और ई-समन में 10 में से 6.74 अंक दर्ज किए गए हैं। न्याय श्रुति में प्रदेश को पांच में से पांच अंक मिले हैं। इन मानकों की हर महीने क्राइम मीटिंग में समीक्षा की जा रही है।

ई-फॉरेंसिक 2.0 से 6,334 केस जुड़े

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधों की जांच मजबूत करने के लिए प्रदेश में ई-फॉरेंसिक 2.0 व्यवस्था लागू की गई है। जुलाई 2026 से अब तक इस सिस्टम में 6,334 केस प्राप्त हुए हैं और 535 मामलों की रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

इस व्यवस्था के तहत केस का रजिस्ट्रेशन, आवंटन, रिपोर्ट तैयार करना और रिपोर्ट भेजने जैसे काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं। फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण बढ़ाने की भी तैयारी है।

इसके लिए प्रदेश की 12 प्रयोगशालाओं के आठ-आठ अनुभागों में कुल 192 हाई-एंड डेस्कटॉप की मांग प्रस्तावित की गई है। केस से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (NAS) या क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।

1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक लैब की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

आईसीजेएस 2.0 के तहत प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की योजना है। इसके लिए एसडी-वैन आधारित नेटवर्क और जरूरी तकनीकी उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

पुलिस विभाग को डेस्कटॉप, यूपीएस, टैबलेट, मल्टीफंक्शन प्रिंटर, वेबकैम और क्यूआर कोड रीडर जैसे उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सीसीटीएनएस के माध्यम से केस का डेटा दर्ज करने और क्यूआर कोड तैयार करने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा। इससे थानों और फॉरेंसिक लैब के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होगा।

जेलों और अदालतों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी मजबूत

कारागारों में भी डिजिटल सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। जेलों के लिए डेस्कटॉप, बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवाइस, स्कैनर और वेबकैम जैसे उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।

इसके अलावा 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और स्थापना का काम पूरा किया जा चुका है। इससे जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा मजबूत होगी।

सरकार का लक्ष्य है कि पुलिस, फॉरेंसिक, अभियोजन, जेल और अदालतों के बीच बेहतर डिजिटल तालमेल बने। इससे जांच में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रभावी हो सकेगी।