समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह और संजय निषाद ने निशाना साधा है। दयाशंकर सिंह ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कांग्रेस के विरोध में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था, आज अखिलेश यादव उसी के साथ गठबंधन कर रहे हैं। उन्होंने इसे मुलायम सिंह यादव के विचारों का अपमान बताया। वहीं, संजय निषाद ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जनता अपना फैसला कर चुकी है और सपा के वादों पर अब भरोसा नहीं है।
2027 के चुनाव को लेकर संजय निषाद का दावा
संजय निषाद ने कहा कि 2027 के चुनाव के लिए जनता अपना फैसला कर चुकी है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास के काम हुए हैं, उससे जनता ने अपना मन पहले ही बना लिया है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के वादों पर जनता अब भरोसा नहीं करती।
अखिलेश यादव के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना से जुड़े सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि जनता ही फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि कई बार जितना बोला जाता है, उसका उल्टा ही होता है।
कांग्रेस से गठबंधन पर दयाशंकर सिंह का हमला
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव के कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस के खिलाफ समाजवादी पार्टी का गठन किया था, लेकिन आज अखिलेश यादव उसी पार्टी के साथ गठबंधन कर रहे हैं।
दयाशंकर सिंह ने इस गठबंधन को स्वार्थ पर आधारित बताया और कहा कि अखिलेश यादव को अपने पिता के सम्मान में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए।
एक्सप्रेसवे को लेकर भी साधा निशाना
दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे बनाया गया और इसमें भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे बनाए गए हैं और सड़कों का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है।
पत्रकार के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा
अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों के सम्मान की बात किए जाने पर दयाशंकर सिंह ने शाहजहांपुर की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जला दिया गया था।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर अखिलेश यादव पत्रकारों के सम्मान की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके मुताबिक उनके कार्यकाल में पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हुआ।