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गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सरयू घाट पर भक्तों ने लगाई आस्था की डुबकी

अयोध्या में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू घाट पहुंचे और नदी में आस्था की डुबकी लगाई। सुबह से ही उत्तर प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु सरयू नदी के तट पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए।गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों के लिए बेहद पवित्र पर्व है, जिसे भारत, नेपाल, भूटान समेत कई देशों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वेद व्यास को समर्पित है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की। उन्हें आदि गुरु यानी प्रथम गुरु के रूप में भी सम्मानित किया जाता है।

मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का सम्मान और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। वाराणसी में इस दिन गुरु मंत्र प्राप्त करने की भी परंपरा है। आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र स्नान और दान-पुण्य को भी बेहद शुभ माना जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को जीवन में सफलता का मार्गदर्शक माना गया है। धार्मिक नगरी वाराणसी में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हजारों लोग अपने गुरुओं से मिलने पहुंचते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें उपहार भेंट करते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह पर्व केवल हिंदू धर्म में ही नहीं, बल्कि जैन, बौद्ध और सिख समुदायों में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बौद्ध धर्म में मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने अपना पहला धर्मचक्र प्रवर्तन किया था।