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दिल्ली में राहुल गांधी से मिले अभिषेक बनर्जी, TMC में जारी सियासी संकट के बीच बढ़ी हलचल

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से 10 जनपथ स्थित आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब TMC लगातार इस्तीफों और अंदरूनी राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। इससे एक दिन पहले, मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने भी नई दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी।

बुधवार को TMC की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अपने फैसले पर उन्होंने कहा कि वह "दो नावों पर सवार" नहीं रहना चाहती थीं। सुष्मिता देव ने कहा, "मुझे यह निर्णय लेने के लिए क्या प्रेरित किया, यह एक लंबी कहानी है। राजनीति में हर बात सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता। मैं ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती थी जहां मैं दो नावों पर सवार रहूं। राजनीति करने का यह सही तरीका नहीं है।"

इससे पहले 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी संसद के उच्च सदन और TMC की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की भारी हार के लिए ममता बनर्जी सरकार के "15 वर्षों के अराजक शासन" को जिम्मेदार ठहराया था।लगातार हो रहे इस्तीफों के बीच TMC में संभावित विभाजन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसद बगावती रुख अपनाए हुए हैं।

बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "हम 20 सांसद हैं जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। हम पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।" बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव प्रभारी एवं मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठकों ने इस संभावना को बल दिया है कि यह गुट NDA में शामिल हो सकता है।

संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी दल के सांसद दल बदलते हैं तो उन्हें अयोग्यता से बचने के लिए अपनी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों के समर्थन के साथ किसी अन्य दल में विलय करना होगा। TMC में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और शीर्ष नेताओं की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकातों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।