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हिमाचल प्रदेश में मानसून से पहले राज्य भर में 10वीं मॉक ड्रिक का आयोजन

हिमाचल प्रदेश में खास कर मानसून में भूकंप, भूस्खलन और बादल फटना आम बात है। लिहाजा अधिकारियों ने राज्य भर में इमरजेंसी रेस्पॉन्स एजेंसियों की तैयारी और तालमेल को परखने के लिए आपदा प्रबंधन पर 10वीं मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की। शिमला में कई विभागों और इमरजेंसी सेवाओं के कर्मचारियों ने बचाव कार्यों के प्रदर्शन और जन-जागरूकता गतिविधियों में हिस्सा लिया। उनका मकसद इमरजेंसी रेस्पॉन्स सिस्टम की जांच करना था।

मॉक ड्रिल का आयोजन भूकंप को ध्यान में रखते हुए किया गया था। अलग-अलग एजेंसियों की रेस्पॉन्स टीम ने साथ मिलकर वास्तविक हालत में कम्युनिकेशन चैनल, बचाव काम और तालमेल की जांच की। ड्रिल में स्वयंसेवकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिकारियों ने जोर दिया कि आपदा के समय समुदायों की भागीदारी रेस्पॉन्स की पहली कड़ी होती है। प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले पहाड़ी राज्य में मॉक ड्रिल का आयोजन इस बात की तस्दीक करता है कि तैयारी, जन-जागरूकता और आपसी तालमेल के साथ की गई कार्रवाई ही प्राकृतिक आपदाओं का विनाश कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।