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महाराष्ट्र में 35 दिनों में तपेदिक के 6,100 से अधिक नए मामले सामने आए

मुंबई, 24 जून (भाषा) केंद्र सरकार के ‘100-दिवसीय तपेदिक मुक्त भारत अभियान’ के पहले 35 दिनों के दौरान महाराष्ट्र में तपेदिक (टीबी) के 6,111 नये मामलों का पता चला है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आकलन प्रणाली के जरिए राज्य के 11,091 गांवों को उच्च जोखिम वाला चिह्नित किया गया है। यह जानकारी राज्य के एक मंत्री ने बुधवार को विधानसभा में दी।

जन स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि केंद्र की एआई-आधारित प्रणाली ने ‘100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत नागपुर के 482, यवतमाल के 539, अमरावती के 504, नासिक के 488 और रायगढ़ के 488 गांवों को उच्च जोखिम वाला चिह्नित किया है।

उन्होंने कहा कि हालांकि यह दावा सही नहीं है कि विदर्भ के कपास उत्पादक क्षेत्रों या जनजातीय बहुल इलाकों में राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में टीबी का प्रकोप असामान्य रूप से अधिक है।

मंत्री ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सभी जिलों में जोखिम-आधारित जांच, मामलों का पता लगाना और ‘निक्षय’ पोर्टल पर पंजीकरण नियमित रूप से किया जाता है। किसी भी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में टीबी के असामान्य रूप से अधिक मामले नहीं पाये गए हैं।’’

जिला-वार विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच लातूर जिले में टीबी के 729 नए मरीज मिले और वर्तमान में 1,020 मरीज उपचाराधीन हैं।

लिखित उत्तर के अनुसार, अहिल्यानगर जिले में वर्ष 2025 के दौरान टीबी के 4,493 नए मामले और 92 मौतें दर्ज की गईं। वहीं जनवरी से मई 2026 के बीच 1,846 नए मरीजों की पहचान हुई और 10 मौतें दर्ज की गईं।

आबिटकर ने यह दावा भी खारिज किया कि एआई-सक्षम जांच उपकरणों या सीबी-एनएएटी मशीनों की कमी के कारण रोग की पहचान और उपचार में देरी हो रही है।

भाषा अमित नरेश

नरेश