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उच्च न्यायालय ने युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव की 10 वर्ष की सजा निलंबित की

प्रयागराज, 18 जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2010 में वाराणसी की एक अदालत द्वारा भारतीय युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार उपाध्याय को सुनाई गई 10 वर्ष की सजा निलंबित कर दी है।

उच्च न्यायालय ने वाराणसी की अदालत द्वारा उपाध्याय को दोषी ठहराने वाले आदेश के अमल पर भी रोक लगा दी है।

सजा और दोषसिद्धि निलंबित करने के अनुरोध वाली मनीष कुमार उपाध्याय की याचिका पर न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने 11 जून को अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता मनीष कुमार उपाध्याय को सुनाई गई निलंबित रहेगी और उनके खिलाफ दोषसिद्धि के आदेश के अमल पर भी, मौजूदा अपील लंबित रहने के दौरान रोक रहेगी।

अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 16 जुलाई, 2010 को उपाध्याय को आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 34 (साझा इरादा) के तहत दोषी ठहराया था और उन्हें 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी और साथ ही 25,000 रुपये जुर्माना भी लगाया था।

उपाध्याय इस मामले में पहले से ही जमानत पर हैं। उनके वकील ने सजा निलंबित करने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की है ताकि वह भविष्य में चुनाव लड़ सकें।

कानून के मुताबिक, यदि अदालत किसी दोषी को दो या दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाती है तो वह कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकेगा।

सुनवाई के दौरान, उपाध्याय के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस अदालत की एक पीठ द्वारा नौ जनवरी, 2020 को पारित आदेश पर जमानत पर रिहा किया गया था।

वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे मौजूदा मामले में झूठा फंसाया गया है।

वकील ने कहा कि उपाध्याय सजा के निलंबन के लिए आवेदन लंबित रहने के चलते आगामी चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि जमानत पर जेल से बाहर रहने के दौरान उपाध्याय ने स्वतंत्रता का कोई दुरुपयोग नहीं किया और इस अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का अनुपालन किया।

उन्होंने यह भी दलील दी कि उनके मुवक्किल का मौजूदा मामले को छोड़कर कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने दोषसिद्धि और सजा के निलंबन की याचिका का विरोध किया।

भाषा सं राजेंद्र शफीक

शफीक