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केंद्र ने हर ग्रामीण सड़क की ‘‘कोडिंग और डिजिटल मैपिंग’’ का प्रस्ताव रखा

नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण बुनियादी ढांचा नियोजन, शासन, सेवाओं की आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से देश के प्रत्येक गांव की सड़कों को एक अनूठा कोड, डिजिटल पहचान और मानकीकृत वर्गीकरण की राष्ट्रव्यापी प्रणाली का प्रस्ताव रखा है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित 'इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम' (गांव के भीतर सड़क कोडिंग और ग्रेडिंग प्रणाली) को जल्द ही आम जनता के सुझावों के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश भर के सभी गांवों की आंतरिक सड़कों के नामकरण, कोडिंग और उनका कंप्यूटर व सैटेलाइट के जरिए डिजिटल नक्शा तैयार (डिजिटल मैपिंग) करने के लिए मानकीकृत ढांचा तैयार करना है।

अधिकारियों के अनुसार, यद्यपि भारत ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसयू) जैसी योजनाओं के तहत व्यापक ग्रामीण सड़क नेटवर्क विकसित किया है, लेकिन गांवों के भीतर की आंतरिक सड़कों और गलियों का बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड नहीं है। इसके कारण एंबुलेंस, डाक सेवाओं, सरकारी एजेंसियों और नौवहन ऐप (गूगल मैप) आदि को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्तावित ढांचे के तहत, गांवों के भीतर की सड़कों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक सड़क को राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक उसकी स्थिति (लोकेशन) से जुड़ा अनूठा ‘अल्फान्यूमेरिक कोड’ (अक्षर और संख्या आधारित कोड) आवंटित किया जाएगा।

भाषा सुमित अविनाश

अविनाश