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न्यायालय ने एम्स के कार्यवाहक निदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वैवाहिक मामले में हलफनामा दाखिल न करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कार्यवाहक निदेशक को अवमानना ​​का नोटिस जारी कर उनसे इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि एम्स के निदेशक को 16 अप्रैल को इस मामले में प्रतिवादी बनाया गया था और उन्हें हलफनामा दाखिल करके स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने कहा कि एक हलफनामा दायर किया गया है और इसका सबसे ‘‘आपत्तिजनक’’ हिस्सा यह है कि एम्स-नयी दिल्ली में उप सचिव होने का दावा करने वाले निशांत कुमार को दस्तावेज दायर करने के लिए अधिकृत किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हम यहां यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमने विशेष रूप से एम्स के निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा था और किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति को अधिकृत करके अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है।’’

उच्चतम न्यायालय को सूचित किया गया कि एम्स-नयी दिल्ली में फिलहाल कोई स्थायी निदेशक नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘एक अन्य प्रश्न पर कि वर्तमान में कार्यवाहक निदेशक के पद पर कार्यरत व्यक्ति ने स्पष्टीकरण क्यों दाखिल नहीं किया है, इसका उत्तर यह है कि वह केवल अस्थायी रूप से इस पद पर कार्यरत है।’’

अदालत ने कहा कि वह इस जवाब से न केवल ‘‘आश्चर्यचकित’’ हैं बल्कि ‘‘स्तब्ध’’ भी है।

पीठ ने कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति जो किसी पद पर, चाहे स्थायी रूप से या अस्थायी रूप से है, उस पद की जिम्मेदारी लेने और उसके कर्तव्यों का पालन करने के लिए बाध्य है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘न्यायालय के मत के अनुसार, एम्स, नयी दिल्ली के वर्तमान कार्यवाहक निदेशक ने अवमानना ​​की है। तदनुसार, डॉ. निखिल टंडन, कार्यवाहक निदेशक, एम्स, नयी दिल्ली, को प्रतिवादी संख्या चार के रूप में शामिल किया गया है। उनके विरुद्ध अवमानना ​​का नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई की तारीख यानी 7 जुलाई, 2026 को दोपहर 12 बजे उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा और अपना स्पष्टीकरण देना होगा।’’

इस मामले के संबंध में, सर्वोच्च न्यायालय ने एम्स के ‘फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी’ विभाग द्वारा प्रस्तुत डीएनए विश्लेषण रिपोर्ट का संज्ञान लिया।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि एक बच्चे का डीएनए प्रोफाइल पक्षों के प्रोफाइल से मेल खाता है और पुष्टि करता है कि संबंधित व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता था।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश