नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा पिछले आठ वर्षों में आयोजित परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनियमितताओं के मामलों और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए श्वेत पत्र जारी किया जाए।
संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष सिंह ने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब लाखों छात्र भारी दबाव में हैं, तो व्यवस्था में उनका भरोसा मजबूत करना जरूरी है।
सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं आपको एक बेहद महत्वपूर्ण चिंता से अवगत कराने के लिए पत्र लिख रहा हूं जिसे पिछले कुछ सप्ताह में कई विद्यार्थियों ने मेरे सामने रखा है। जब नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने से लाखों विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है, तब ऐसे में उनके लिए तनाव का एक बड़ा कारण इस मामले में स्पष्टता का अभाव है कि पहले लीक हुए प्रश्नपत्रों के मामलों की जांच किस तरह हुई?’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि प्रश्नपत्र लीक से संबंधित मामलों और उन पर सीबीआई और केंद्र एवं राज्य सरकारों की अन्य जांच एजेंसियों द्वारा कैसे मुकदमा चलाया जा रहा है।
सिंह ने कहा कि आधिकारिक जानकारी के अभाव में कई खबरों और अफवाहों ने उसकी जगह ले ली है।
उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, एक यह शिकायत मुझे बार-बार मिली है कि हजारीबाग में नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र लीक मामले का मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ मुखिया कथित तौर पर जमानत पर बाहर है। इसी तरह, सीबीआई ने कथित तौर पर एक ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दायर कर कहा कि 2024 की उस विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) में कोई अनियमितता नहीं हुई थी जिसे उस समय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने रद्द कर दिया था।’’
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि जब दिल्ली की एक अदालत ने अपनी ‘क्लोजर रिपोर्ट’ के लिए लिखित स्पष्टीकरण मांगा तो सीबीआई ने और समय मांगा।
सिंह के मुताबिक, स्पष्टीकरण देने में सीबीआई की देरी से भारत के छात्रों के बीच नकारात्मक संदेश गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के छात्रों को न्याय दिलाने की प्रशासन की क्षमता और इरादे में नया विश्वास पैदा करने लिए मैं प्रस्ताव रखता हूं कि भारत सरकार पिछले आठ वर्षों में एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं के दौरान प्रश्न पत्र लीक होने या अनियमितताओं की घटनाओं की सूची का दस्तावेजीकरण करते हुए एक श्वेत पत्र जारी करे।’’
उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र में एनटीए और जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई की भी सूची होनी चाहिए जिसमें यह जानकारी शामिल हो कि इनमें से प्रत्येक परीक्षा के संबंध में किसे गिरफ्तार किया गया।
सिंह ने कहा कि श्वेत पत्र में प्रत्येक जांच की स्थिति का उल्लेख होना चाहिए कि जांच जारी है या पूरी हो चुकी है और जांच एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल किया है या ‘क्लोजर रिपोर्ट’?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सिंह के इस पत्र का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘कम-से-कम दो खबरों ने छात्रों के बीच इस बात को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है कि क्या सीबीआई पेपर लीक माफिया के खिलाफ न्याय सुनिश्चित करने में सक्षम और इच्छुक है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहली खबर यह है कि हजारीबाग नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को जमानत मिल गई है। दूसरी खबर यह है कि सीबीआई ने 2024 की यूजीसी-नेट परीक्षा, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था, में किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है और इस क्लोजर रिपोर्ट पर दिल्ली की अदालत को स्पष्टीकरण देने में भी देरी करने की अपील की है।’’
उनका कहना था कि ऐसी खबरों को और बल तब मिलता है, जब इन पेपर लीक मामलों की जांच की स्थिति को दर्ज करने वाला कोई एकीकृत दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होता।
रमेश ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को पेपर लीक के मामलों, हर मामले में हुई जांच और अब तक आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। इससे भारत के छात्रों को हमारी परीक्षा और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर भरोसा दिलाने में मदद मिल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब उनका विश्वास बुरी तरह धराशायी हो चुका है।
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