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तिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद : अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका खारिज

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी गई थी, जिन्होंने हिंदू श्रद्धालुओं को तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर ‘कार्तिकेय दीपम’ जलाने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन रमजान के दौरान धार्मिक समारोहों के आयोजन की इजाजत दे दी थी।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के आदेश में हस्तक्षेप का अनुरोध ठुकरा दिया, लेकिन याचिकाकर्ता ‘हिंदू धर्म परिषद’ पर लगाए गए जुर्माने की राशि घटा दी।

पीठ ने दो जून को पारित आदेश में कहा, “हम उच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन हमारा मानना ​​है कि 50,000 रुपये का जुर्माना बहुत ज्यादा है और मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए इसे घटाकर 5,000 रुपये किया जा सकता है। तदनुसार आदेश दिया जाता है।”

पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय के आदेश का बाकी हिस्सा अपरिवर्तित रहेगा। इस स्पष्टीकरण के साथ विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।”

उच्च न्यायालय ने नौ अप्रैल को केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को यह निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी कि वह तमिलनाडु सरकार से उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहे, जिन्होंने हिंदू श्रद्धालुओं को तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर ‘कार्तिकेय दीपम’ जलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन रमजान के दौरान धार्मिक समारोहों के आयोजन की इजाजत दे दी थी।

उच्च न्यायालय ने यह आदेश मदुरै स्थित ‘हिंदू धर्म परिषद’ के प्रबंध न्यासी केके रमेश की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था।

भाषा पारुल माधव

माधव