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आई-पैक के निदेशक चंदेल को ईडी की 10 दिन की हिरासत में भेजा गया

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को धनशोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद 10 दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चंदेल को पूछताछ के बाद राज्य में कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में सोमवार देर शाम गिरफ्तार किया था। चंदेल एनएलआईयू (राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय) भोपाल से कानून में स्नातक हैं और आई-पैक में 33 प्रतिशत शेयरधारक हैं।

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि चंदेल को दिल्ली पुलिस की उस प्राथमिकी का संज्ञान लेकर दर्ज किए गए एक नए मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसमें ‘इंडियन पैक (पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (आई-पैक) शामिल है। उन्होंने कहा कि यह मामला कोयला घोटाले की जांच से ‘‘जुड़ा’’ है।

आई-पैक 2021 से तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रही है। इसके ग्राहकों में कई अन्य राजनीतिक दल भी शामिल हैं।

इस ताजा घटनाक्रम पर आई-पैक की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि चंदेल को पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया और सोमवार देर रात विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत ने चंदेल को ईडी की 10 दिन की हिरासत में भेज दिया।

निदेशालय ने दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक एवं निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर और मुंबई में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के परिसर पर दो अप्रैल को छापा मारा था।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसे आई-पैक द्वारा कथित वित्तीय अनियमितताएं किए जाने और विभिन्न तरीकों से ‘‘धनशोधन’’ किए जाने के ‘‘कई’’ मामलों का पता चला है। इनमें हिसाब में दर्ज और बिना हिसाब वाले धन की प्राप्ति, बिना किसी कारोबारी साख के असुरक्षित ऋण लेना, फर्जी बिल और चालान जारी करना, तीसरे पक्षों से धन प्राप्त करना तथा अंतरराष्ट्रीय हवाला सहित हवाला माध्यमों से नकदी का लेन-देन शामिल है।

निदेशालय ने दावा किया कि आई-पैक ने अपराध से अर्जित करीब 50 करोड़ रुपये की आय का धनशोधन करने में भूमिका निभाई।

उसने कहा कि संबंधित कानून के अनुसार, यदि कोई अपराध कंपनी निदेशकों की सहमति, मिलीभगत या लापरवाही के कारण किया गया है तो वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे।

तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार रात इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि चंदेल की गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

बनर्जी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘पश्चिम बंगाल चुनाव से महज 10 दिन पहले आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी सिर्फ चिंताजनक नहीं है, बल्कि यह समान अवसर वाला चुनावी माहौल प्रदान करने की अवधारणा को भी झकझोरती है।’’

ईडी ने इस मामले में आठ जनवरी को आई-पैक के कार्यालय और इसके संस्थापक एवं निदेशकों में शामिल प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की थी। इसके बाद तब विवाद शुरू हो गया था जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं और दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं।

निदेशालय ने आरोप लगाया था कि कोलकाता में आई-पैक और जैन के खिलाफ छापेमारी की उसकी कार्रवाई में बनर्जी ने ‘‘बाधा’’ डाली और संबंधित दस्तावेज एवं उपकरण मुख्यमंत्री तथा राज्य प्रशासन ने जबरन अपने कब्जे में ले लिए।

मुख्यमंत्री और तृणमूल ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छापा मारकर आई-पैक परिसर से चुनावी रणनीति से संबंधित उसके दस्तावेज लेने की कोशिश कर रहा था।

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा।

भाषा

सिम्मी अमित

अमित