नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को शहर के शालीमार बाग इलाके में एक सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए विध्वंस अभियान की इजाजत दे दी और वहां रहने वालों को 30 मई तक जगह खाली करने का समय दिया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ शालीमार बाग निवासी सरोज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सरोज ने हैदरपुर गांव में सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन पर रहने वाले करीब 98 लोगों की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा, विधिक सहायता वकील धीरज कुमार सिंह और स्थायी वकील संजय कुमार पाठक पेश हुए।
गत छह अप्रैल के एक आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विस्तार, खासकर वे जो जरूरी सेवाओं तक पहुंच से जुड़ी हैं - जैसे कि चिकित्सा देखभाल, शिक्षा और आग से सुरक्षा, उनमें अब और देरी नहीं होनी चाहिए। ऐसी देरी शालीमार बाग के निवासियों के व्यापक हितों के लिए नुकसानदायक होगी।’’
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वाले निजी लोगों के हितों को व्यापक जनहित के आगे झुकना होगा, जिसमें निवासियों की जरुरतें और इलाके में वाहनों के सुचारू आवागमन की जरुरतें शामिल हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत का मानना है कि सड़क चौड़ी करने के काम में अब और देरी नहीं की जा सकती। निवासियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस काम में किसी भी तरह की रुकावट या बाधा न आए।’’
याचिकाकर्ताओं ने तोड़फोड़ और बेदखली से संरक्षण की मांग की थी। उनका दावा था कि कई परिवार दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं, और अगर उन्हें बेदखल किया गया तो वे बेघर हो जाएंगे।
भाषा वैभव पवनेश
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