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संघर्ष के दौर में भारतीय मूल्य कहीं अधिक प्रासंगिक: आईसीसीआर महानिदेशक

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला ने कहा कि भारत शांति, सद्भाव और सार्वभौमिक भाईचारे में विश्वास रखता है तथा युद्ध और संघर्ष के दौर में भारतीय मूल्य और भी प्रासंगिक होते जा रहे हैं।

उन्होंने आईसीसीआर के 77वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार शाम को आज़ाद भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि दुनिया को प्राचीन भारतीय लोकाचार वसुधैव कुटुम्बकम की याद दिलाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “यह कोई रूढ़ीवाद नहीं है, बल्कि वसुधैव कुटुम्बकम एक ऐसी अवधारणा है जिसका विश्व में हर कोई सराहना करता है।’’

आईसीसीआर, विदेश मंत्रालय की सांस्कृतिक इकाई है।

आईसीसीआर की महानिदेशक ने अपने बयान में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संघर्ष सहित दुनिया में जारी कई संघर्षों का उल्लेख किया।

पश्चिम एशिया संघर्ष में अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने सहिेत एक सशर्त युद्धविराम पर सहमति जताई है।

भारत ने दो सप्ताह के इस युद्धविराम का स्वागत किया है।

महानिदेशक ने कहा कि आईसीसीआर की स्थापना नौ अप्रैल 1950 को हुई थी और इसकी स्थापना के अब 76 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत को विश्व से जोड़ने, इसकी समृद्धि और विविधता भरी संस्कृति को प्रदर्शित करने और इसके शाश्वत मूल्यों का विश्व में प्रसार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं।’’

महानिदेशक ने कहा, ‘‘युद्ध, संघर्ष के आज के दौर में, विश्व में भारत के ये मूल्य और भी अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि मानवता परस्पर जुड़ी हुई है जो ‘‘साथ में समृद्ध हो सकती है या एक साथ नष्ट हो सकती है।’’

नंदिनी ने कहा, ‘‘भारत का मूलमंत्र है - शांति, सद्भाव और सार्वभौमिक भाईचारा।’’

भाषा

प्रचेता सुभाष

सुभाष