तेहरान, सात अप्रैल (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान उनकी ओर से दी गई मंगलवार की नवीनतम समय-सीमा तक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने समेत एक समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो ‘‘आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा’’।
इसी बीच, ईरान पर किये गए हवाई हमलों में दो पुल और एक रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने ईरान के तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह दूसरी बार था जब अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर हमला किया है।
ट्रंप ने पहले भी समयसीमा बढ़ाई थी, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन में मंगलवार रात आठ बजे तक की समयसीमा अंतिम है। इसी के साथ दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी चरम पर पहुंच गई, जिससे ईरानी नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता, तो उसके सभी बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा। इस जलडमरूमध्य के रास्ते शांति काल में दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि उनके सहित 1.4 करोड़ लोगों ने युद्ध लड़ने के लिए स्वेच्छा से अपनी सेवाएं देने की पेशकश की है।
यह स्पष्ट नहीं है कि हालिया हवाई हमले ट्रंप की पुलों पर हमले की धमकी से जुड़े थे या नहीं। कम से कम दो लक्ष्य ईरान के रेल नेटवर्क से जुड़े थे।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनके देश के लड़ाकू विमानों ने ईरान में पुलों और रेलवे पटरियों पर हमला किया है।
इजराइली प्रधानमंत्री के कार्यालय से जारी एक एक बयान में नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड इन पुलों और रेलमार्ग का इस्तेमाल हथियार बनाने के लिए सामग्री का परिवहन करने के लिए कर रहा था।
इससे पहले, इजराइल ने फारसी भाषा में एक चेतावनी जारी कर ईरानियों को दिन भर रेलगाड़ियों से बचने के लिए कहा था।
वहीं, ईरान ने इजराइल और सऊदी अरब पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिसके चलते एक प्रमुख पुल को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
ईरान हालांकि, उन्नत अमेरिकी और इजराइली हथियारों या हवाई प्रभुत्व का मुकाबला नहीं कर सकता, लेकिन जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा रही है, जिससे ट्रंप पर देश और विदेश दोनों जगह से इस गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने का दबाव बढ़ रहा है।
कूटनीति के रास्ते संकट को सुलझाने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने कहा कि बातचीत जारी है - लेकिन ईरान ने नवीनतम अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, और यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के संभावित हमलों को रोकने के लिए समय पर कोई समझौता हो पाएगा या नहीं।
विश्व के नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप ने जिस तरह की विनाशकारी कार्रवाई की धमकी दी है, वह कार्रवाई युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है।
ट्रंप द्वारा तय समसीमा जैसे-जैसे नजदीक रही है, दोनों पक्षों की ओर से उग्र बयानबाजी तेज होती जा रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी कि ‘‘आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो सकता है’’, लेकिन वाशिंगटन में रात आठ बजे की समय सीमा से पहले ईरान के पास आत्मसमर्पण करने का मौका है।
उन्होंने अपनी सोशल मीडिया साइट पर लिखा, ‘‘आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन शायद ऐसा ही होगा।’’
हालांकि, ट्रंप के बयान में समाधान की गुंजाइश अब भी रखी गई है और उन्होंने कहा कि ‘‘शायद कुछ क्रांतिकारी और अद्भुत बात हो सकती है।’’
इससे पहले, ईरानी अधिकारी अलीरजा रहीमी ने एक वीडियो संदेश जारी कर ‘‘सभी युवाओं, एथलीटों, कलाकारों, छात्रों और विश्वविद्यालय के छात्रों और उनके प्रोफेसर’’ से बिजली संयंत्रों के चारों ओर मानव शृंखला बनाने का आह्वान किया।
पश्चिम देशों के साथ तनाव बढ़ने के समय ईरानियों ने पूर्व में भी परमाणु स्थलों के आसपास मानव शृंखलाएं बनाई थीं।
स्थानीय ईरानी मीडिया ने मंगलवार को बिजली संयंत्रों के चारों ओर मानव शृंखला की कुछ तस्वीरें साझा की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि यह पहल कितनी व्यापक थी या क्या ये तस्वीरें सरकार समर्थिक प्रतिवाद भर था।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि सरकारी मीडिया और टेक्स्ट मैसेज अभियानों के माध्यम से लोगों से युद्ध के लिए स्वेच्छा से आगे आने की अपील की गई थी, जिसके जवाब में 1.4 करोड़ ईरानियों ने अपनी सहमति दी है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह स्वयं भी उनके साथ शामिल होंगे, वहीं अर्धसैनिक बल रिवॉल्यूशनरी गार्ड के एक जनरल ने माता-पिता से अपने बच्चों को चौकियों पर तैनात करने के लिए भेजने का आग्रह किया।
इस बीच, ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी को अंजाम देते हैं, तो ईरान ‘‘अमेरिका और उसके सहयोगियों को वर्षों तक क्षेत्र के तेल और गैस से वंचित कर देगा’’ और खाड़ी क्षेत्र में अपने हमलों का विस्तार करेगा।
तेहरान में माहौल निराशाजनक है। एक युवा शिक्षिका ने कहा कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था के कई विरोधियों को उम्मीद थी कि ट्रंप के हमलों से यह व्यवस्था जल्द ही ध्वस्त हो जाएगी।
उन्होंने सुरक्षा कारणों से पहचान गुप्त रखते हुए कहा, ‘‘अब, जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, उन्हें डर है कि अमेरिका और इजराइल के हमले अराजकता फैला देंगे। ’’
शिक्षिका ने कहा, ‘‘अगर हमारे पास इंटरनेट नहीं होंगे, और अगर हमारे पास बिजली, पानी और गैस नहीं होगा, तो हम सचमुच पाषाण युग में वापस चले जाएंगे, जैसा कि ट्रंप ने कहा है।’’
फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरोट ने संयम बरतने की अपील करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेताओं में शामिल होते हुए कहा कि असैन्य और ऊर्जा अवसंरचना को लक्षित करने वाले हमले ‘‘युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा निषिद्ध हैं’’।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे निस्संदेह तनाव और प्रतिशोध का एक नया दौर शुरू हो जाएगा, जो इस क्षेत्र और विश्व अर्थव्यवस्था को एक दुष्चक्र में घसीट लेगा।’’
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत असैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले प्रतिबंधित हैं।
इस बीच, इजराइल और अमेरिका द्वारा तेहरान पर सिलसिलेवार हवाई हमले जारी हैं, जिनमें रिहायशी इलाके भी शामिल हैं। पूर्व में ऐसे हमलों में ईरानी सरकार और सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाया गया था।
इजराइल की सेना ने कहा कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान के शिराज में स्थित एक पेट्रोकेमिकल उत्पादन परिसर पर हमला किया।
ईरानी अधिकारियों ने बाद में बताया कि हवाई हमलों में एक रेलवे पुल, एक रेलवे स्टेशन और एक राजमार्ग पुल को निशाना बनाया गया है।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों का विवरण तत्काल उपलब्ध हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि रात भर हुए हमले उन लक्ष्यों पर किए गए थे जिन पर पहले भी हमले हो चुके थे और ये तेल अवसंरचना को लक्षित नहीं थे।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट द्वारा किए उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों के विश्लेषण के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दौर में, अमेरिकी सेना ने खार्ग स्थित हवाई सुरक्षा तंत्र, एक रडार स्थल, एक हवाई पट्टी एक होवरक्राफ्ट बेस पर हमला किया था।
सऊदी अरब ने कहा कि उसने ईरान द्वारा दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन को नाकाम कर दिया है।
सऊदी अरब ने बहरीन (जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा स्थित है) और अरब प्रायद्वीप के बीच एकमात्र सड़क संपर्क मार्ग, किंग फहद कॉज़वे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरान ने इजराइल पर भी मिसाइलों और ड्रोन से हमले किये।
ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से 1,900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन सरकार ने कई दिनों से मृतकों की संख्या के आंडक़ों को अद्यतन नहीं किया है।
इजराइली सेना लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है। अबतक लेबनान में 1500 से अधिक लोग मारे गए हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इस दौरान 11 इजराइली सैनिकों की भी जान गई है।
इजराइल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को हमले शुरू करने के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों के आवागमन को पूरी तरह से रोक दिया। इस अवरोध और ईरान द्वारा अपने पड़ोसियों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों के कारण तेल की कीमतें भारी इजाफा हुआ है। पूरी दुनिया में पेट्रोल, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही है।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो युद्ध की शुरुआत से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।
एपी धीरज माधव
माधव