नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में 'जैसा है जहां है' पात्रता मानदंड के आधार पर संपत्तियों को नियमित करने के लिए एक नयी नीति की मंगलवार को घोषणा की। इसके तहत अब सभी भवनों को दिल्ली नगर निगम से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
इस कदम से इन इलाकों में रहने वाले 10 लाख परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नये नियमों के अनुसार, निवासियों को अब अपनी संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए क्षेत्र का लेआउट प्लान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और वे केवल एमसीडी द्वारा सूचीबद्ध किसी भी वास्तुकार द्वारा तैयार किया गया भवन योजना ही दे सकते हैं।
इसके अनुसार अब डीडीए नहीं, बल्कि राजस्व विभाग स्वामित्व अधिकार के लिए हस्तांतरण विलेख जारी करेगा। एमसीडी नए निर्माणों की पहचान करने के लिए नियमित ड्रोन सर्वेक्षण करेगी।
नगर निगम 'नियमितीकरण प्रमाण पत्र' जारी करेगा और नागरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए खाली भूखंडों का सर्वेक्षण भी करेगा।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति की घोषणा को शहरवासियों के लिए एक बड़ा दिन बताया।
उन्होंने कहा कि संशोधित नीति के तहत संपत्तियों के स्वामित्व के लिए आवेदन 24 अप्रैल से पीएम-उदय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं और इस कदम से ऐसी कॉलोनियों के लगभग 50 लाख निवासियों को लाभ होगा।
रेखा गुप्ता ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों में स्वामित्व अधिकारों के नियमितीकरण के लिए पीएम-उदय (प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियां आवास अधिकार योजना) योजना 2019 में शुरू की गई थी, लेकिन इसमें कई तकनीकी दिक्कतें आईं, जिसके कारण एक संशोधित नीति की आवश्यकता पड़ी।
उन्होंने कहा कि 2019 की नीति के तहत लगभग 40,000 संपत्ति विलेख जारी किए गए थे और अब सरलीकृत अनुमोदन प्रक्रिया और 45 दिनों के भीतर विलेख जारी करने की समय सीमा निर्धारित होने से प्रक्रिया में तेजी आएगी।
वर्ष 2014 को नियमितीकरण के लिए कट-ऑफ वर्ष माना जाएगा।
खट्टर ने कहा कि 'जैसा है, जहां है' के आधार पर बनाई गई नियमितीकरण नीति अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित पुरानी इमारतों पर लागू होगी, जबकि नये निर्माणों के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करना और उसकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
खट्टर ने कहा, '1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों के भूमि उपयोग को आवासीय माना जाएगा।
कुल 220 अनधिकृत कॉलोनियां नयी नीति के दायरे में नहीं आएंगी क्योंकि वे निषिद्ध भूमि पर स्थित हैं जैसे कि अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइन, दिल्ली के रिज क्षेत्र, या किसी भी कानून के तहत संरक्षित भूमि।
इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर 'जैसी है वैसी ही' के आधार पर लागू होगा। स्वीकृत लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।
पत्रकारों से बात करते हुए खट्टर ने कहा कि इस कदम से न केवल कानूनी स्वामित्व मिलेगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने की सुविधा भी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली एक भविष्य के लिए तैयार शहर के रूप में सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नये चरण का गवाह बन रही है।
भाषा अमित माधव
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