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अदालत ने दिल्ली विधानसभा में एसयूवी के साथ प्रवेश करने वाले व्यक्ति को पुलिस हिरासत में भेजा

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने विधानसभा परिसर में वाहन (एसयूवी) के साथ जबरन प्रवेश करने वाले आरोपी चालक को मंगलवार को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

आरोपी सरबजीत सिंह को मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट कार्तिक टपारिया के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने शुरुआत में 10 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने आठ दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति दी।

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) अतुल श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि सुरक्षा उल्लंघन के पीछे किसी भी साजिश का पता लगाने और संभावित 'आतंकवादी कोण' की जांच करने के लिए 10 दिनों की पुलिस हिरासत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पुलिस को अब तक सिंह का फोन नहीं मिला है, जिसे उसने कथित तौर पर फेंक दिया था।

बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस हिरासत की याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि सिंह मानसिक रूप से अस्थिर है और कई महीनों से नियमित उपचार करा रहा है।

बचाव पक्ष के अनुसार, सिंह दो सप्ताह पहले अचानक बिना किसी को बताए चंडीगढ़ में अपनी बहन से मिलने चला गया था। वकील ने बताया कि इस दौरान उसके परिवार को उसकी गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

सिंह को जब पता चला कि उसका भतीजा लापता हो गया है, तो वह दिल्ली वापस लौट आया। उसके वकील ने बताया कि वह गलती से दिल्ली विधानसभा में घुस गया था, क्योंकि उसे लगा कि यह एक गुरुद्वारा है।

न्यायाधीश ने पूछा, “आप राज्यों के बीच 700 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं और फिर भी मानसिक बीमारी का दावा कर रहे हैं? यह कैसे हो सकता है कि इस अपराध को करने के बाद ही आपको अपनी इन मानसिक समस्याओं का एहसास हो रहा है?”

न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि अगर सिंह मानसिक बीमारी के कारण गाड़ी चलाने में असमर्थ है तो उसे गाड़ी चलाने की अनुमति कैसे दी गई।

बचाव पक्ष के वकील ने जवाब दिया, 'यदि आप चिकित्सा परीक्षण का आदेश देते हैं, तो इससे उसकी मानसिक बीमारी की गंभीरता का पता चल जाएगा।'

उन्होंने सिंह की मानसिक बीमारी से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, लेकिन न्यायाधीश ने उन्हें असंगत पाया।

अभियोजक ने स्पष्ट किया कि हत्या के प्रयास का आरोप इस मामले में इसलिए लगाया गया है क्योंकि सिंह ने सुरक्षाकर्मियों को रोकने की कोशिश करने पर उन पर दो बार गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

अभियोजन पक्ष ने यह भी खुलासा किया कि सिंह ने पहले दो चालकों की सेवाएं ली थी और मार्ग के बारे में उनसे पूछताछ की थी, जो उसके इरादे और उसके कार्यों के बारे में जानकारी को दर्शाता है।

सिंह (37) ‘किसान आंदोलन का समर्थक’’ माना जा रहा है। उसने सोशल मीडिया मंचों पर 2020-21 के आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसान नेताओं के समर्थन में कई पोस्ट साझा किए थे।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिंह ने ‘‘खतरनाक तरीके से गाड़ी चलायी और ऐसा प्रतीत होता है कि उसका इरादा ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को कुचलने का था, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हुआ।’’

पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पंजीकृत नंबर वाली एसयूवी ने दोपहर करीब दो बजे गेट नंबर-2 को तोड़ते हुए विधानसभा परिसर में प्रवेश किया।

अधिकारी ने बताया कि विधानसभा में कुल छह प्रवेश द्वार हैं। गेट नंबर-2 वीआईपी आवाजाही के लिए निर्धारित है और आमतौर पर विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है, जबकि गेट नंबर-1 और सर्विस गेट से नियमित आवागमन होता है।

इस मामले में सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया है।

भाषा नोमान अविनाश

अविनाश