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एसआईआर के बाद मतुआ, अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए: ममता बनर्जी

चकदाहा/बोंगांव, सात अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूचियों से मतुआ और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं।

नदिया जिले के चकदाहा में एक रैली को संबोधित करते हुए, बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिनके नाम एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूचियों से हटा दिए गए थे।

निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पश्चिम बंगाल में लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद राज्य के लिए अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी नहीं की है।

गत 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 63.66 लाख नाम (जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत हैं) हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी।

केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने दावा किया कि कुछ विशेष समुदायों को निशाना बनाकर मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा भेदभाव क्यों? आप मतुआ, राजबंशियों और अल्पसंख्यकों को हटा रहे हैं। क्या आपको लगता है कि लोग इसे नहीं समझते?’’

उन्होंने यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी दिनाजपुर जैसे अल्पसंख्यक आबादी वाले जिलों में, मतदाताओं के नाम ‘‘जूं की तरह मतदाता सूची से चुने गए और हटाए गए’’।

बनर्जी ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय में उनके दखल के बाद, निर्णय के लिए विचाराधीन लगभग 60 लाख मामलों में से लगभग 32 लाख नाम सूचियों में बहाल कर दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों के नाम अब भी मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस आपके साथ खड़ी रहेगी और कानूनी मदद मुहैया कराएगी।’’

घुसपैठ पर केंद्र के रुख पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, लेकिन वह घुसपैठ के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को दोषी ठहरा रही है।

आगामी विधानसभा चुनाव को लोगों की पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाताओं से मतदान के माध्यम से जवाब देने को कहा।

बनर्जी ने कहा, ‘‘यह चुनाव आपके लोकतंत्र, भाषा और सम्मान को बचाने की लड़ाई है ताकि कोई भी आपको विदेशी नहीं कह सके।’’

बोंगांव में एक अन्य रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पहले से अधिक सीटें जीतेगी और लगातार चौथी बार राज्य में सरकार बनाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस अंतत: जीतेगी और पहले से अधिक सीटें हासिल करेगी।’’

बंगाल में 2021 के चुनाव में तृणमूल ने 215 सीटों पर जीत हासिल की थी।

बनर्जी ने कहा, ‘‘यह चुनाव मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने का बदला लेने के लिए है।’’

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि मदर टेरेसा की बनाई मिशनरीज ऑफ चैरिटी के 300 सदस्यों के नाम मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में हटा दिए गए हैं, और रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ के संतों के नाम भी हटा दिए गए हैं।

बनर्जी ने यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, दक्षिण 24 परगना और नदिया जिलों में कई नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि भवानीपुर चुनाव क्षेत्र में, जहां से वह फिर से चुनाव लड़ रही हैं, 40,000 नाम हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें देखना होगा कि पूरक सूची में कितने नाम बहाल किए गए हैं... मैं (बंगाल में) निरुद्ध शिविर नहीं बनने दूंगी। संवैधानिक अधिकार दिए जाने चाहिए, और मैं इन्हें वापस लाने के लिए लड़ती रहूंगी।’’

उत्तर 24 परगना और नदिया जिले के कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले मतुआ समुदाय को लुभाते हुए बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने उन इलाकों में बहुत सारे विकास कार्य शुरू किए हैं।

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर मतुआ समुदाय के वोटों को बांटने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ भोजन किया और उन्हें गले लगाया, जिसमें धर्म कोई रुकावट नहीं बना।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप खाड़ी देशों में जाते हैं, तो आप मुस्लिम शासकों को गले लगाते हैं।’’

बनर्जी ने यह भी दावा किया कि देश से मवेशियों का निर्यात किया जाता है, लेकिन यह कोई मुद्दा नहीं बनता कि यह सही है या गलत।

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उनका (भाजपा) धर्म वोट बांटना है, यह हिंदुत्व नहीं है।’’

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे और मतगणना 4 मई को होगी।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश