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जन जागरूकता से भारत में गौ हत्या को समाप्त करने में मदद मिल सकती है : मोहन भागवत

मथुरा, (उप्र), सात अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि जन जागरूकता से भारत में गोहत्या को समाप्त करने में मदद मिल सकती है।

भागवत ने कहा कि जो भावना देश में अयोध्या में राम मंदिर के लिए थी जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया, वही भावना गायों के लिए भी दिखनी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'समाज को गायों के प्रति समर्पित बनाएं, और गोहत्या तुरंत बंद हो जाएगी। हमें जनता को जागरूक करना होगा, बाकी लोग ऐसा करेंगे।'

शहरों में गाय रखने की बाधाओं को स्वीकार करते हुए, उन्होंने सुझाव दिया कि लोग इसके बजाय 'गौशालाओं' का समर्थन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मंगलवार को वृन्दावन के मलूक पीठ में मलूक दास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर बोल रहे थे ।

उन्होंने कहा, अगर सार्वजनिक भावना अथवा जन भावना है, तो व्यवस्था को इसे स्वीकार करना होगा।

अयोध्या में राम जन्मभूमि से संबंधित उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा, '2014 से 2019 तक राम मंदिर नहीं बना। यह 2019 के बाद आया। क्यों? जब उच्च्तम न्यायालय का कहना था कि उनके पास अन्य बहुत महत्वपूर्ण मामले हैं (सुनवाई के लिए), तो उसने सर्वसम्मति से फैसला दिया। क्यों दिया? यह उन भावनाओं के कारण है, जो देश भर में मंदिर के लिए देखी गईं। यह उसी का परिणाम है।’’

उच्च्तम न्यायालय के 2019 के एक फैसले ने प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था।

उन्होंने कहा कि जो भावना देश भर में राम मंदिर के लिये थी, वही भावना गायों की रक्षा के लिये भी होनी चाहिये। संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘गायों के लिए, आप भी प्रयास कर रहे हैं, हम भी प्रयास कर रहे हैं।’’

इसके बाद यहां अलग से जारी एक बयान में भागवत के हवाले से कहा गया है कि भारत अवश्य विश्व गुरु बनेगा और यह संतों द्वारा दिखाई गई राह के अनुसरण से ही संभव होगा।

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और संतत्व ही दुनिया को सुखी और समृद्ध बनाने का मार्ग दिखाएंगे।

संघ प्रमुख ने पश्चिम एशिया में जारी अशांति की ओर इशारा करते हुये कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि भारत विश्व गुरु बनेगा। इसके लिए संघ संतों के साथ मिलकर प्रयास करेगा।''

उन्होंने कहा कि मलूक पीठ में 452 वर्ष से संत मलूक दास की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं। इससे जीवन दर्शन की सीख सभी को लेनी चाहिए।

इससे पूर्व संघ प्रमुख ने वंशीवट स्थित मलूकपीठ में संत मलूक दास जी की समाधि पर पूजा अर्चना भी की। तदुपरांत उन्होंने गोशाला में गोपूजन कर भारत के कल्याण की कामना भी की।

भाषा रंजन

रंजन

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