नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन करने के आरोपी सात विदेशी नागरिकों को सोमवार को 30 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इनमें छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
इन विदेशी नागरिकों को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की हिरासत पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष पेश किया गया। उनके खिलाफ एक व्यापक आतंकी साजिश के सिलसिले में जांच की जा रही है, जिसमें भारत और म्यांमा में जातीय विद्रोही समूहों से संदिग्ध संबंध और उन्हें ड्रोन प्रशिक्षण देना शामिल है।
सोलह मार्च को अदालत ने इन विदेशी नागरिकों से पूछताछ के लिए उनकी 11 दिनों की हिरासत एजेंसी को सौंपी थी, जिसे बाद में और 10 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया था।
सोमवार को न्यायाधीश ने एनआईए की उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें आरोपियों की न्यायिक हिरासत का अनुरोध किया गया था। आरोपियों की पहचान अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिकों हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर के रूप में हुई है।
अमेरिकी नागरिक वैन डाइक ने अपने परिवार के सदस्यों से वीडियो कॉल करने और अपने वकील से मिलने की अनुमति मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया। न्यायाधीश ने विशेष प्रकोष्ठ से जवाब मांगा और मामले की आगे की सुनवायी की तारीख 8 अप्रैल तय की।
सोलह मार्च को दायर आवेदन में, जांच अधिकारी ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा था कि कुछ यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों पर पर्यटक वीजा पर भारत में दाखिल हुए और गुवाहाटी के लिए उड़ान भरी, जहां से वे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट या संरक्षित क्षेत्र परमिट जैसे आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए बिना मिजोरम चले गए।
जांच अधिकारी ने कहा कि इसके बाद, ये व्यक्ति जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ) के लिए पूर्व-निर्धारित प्रशिक्षण देने की खातिर अवैध रूप से म्यांमा में प्रवेश कर गए।
एनआईए को हिरासत की अनुमति देते हुए अदालत ने आदेश दिया कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए।
आदेश में कहा गया, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्राथमिकी में आरोपियों के बिना अनुमति के मिजोरम, जो एक प्रतिबंधित क्षेत्र है, की यात्रा करने और उसके बाद अवैध रूप से म्यांमा में प्रवेश करने का उल्लेख है। लेकिन इसमें यह भी उल्लेख है कि (म्यांमा में) जातीय सशस्त्र संगठनों से जुड़े ये आरोपी कुछ प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों को हथियार और आतंकवादी उपकरण मुहैया कराकर और उन्हें प्रशिक्षण देकर उनका समर्थन कर रहे हैं।’’
अदालत ने कहा कि ये आरोप निश्चित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों से जुड़े हैं और व्यापक रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए दंड) के अंतर्गत आते हैं।
एजेंसी ने कहा कि जांच का दायरा 'बहुत व्यापक' है, जिसमें न केवल कृत्यों को अंजाम देना बल्कि आतंकवादी गतिविधियों की 'वकालत, उकसाना और तैयारी' भी शामिल है।
भाषा अमित अविनाश
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