Breaking News

CUET UG 2026: तकनीकी गड़बड़ी की बात NTA ने मानी, दोबारा होगी प्रभावित छात्रों की परीक्षा     |   नोएडा के स्पार्क मिंडा फैक्ट्री में लगी भीषण आग, आग बुझाने में जुटी दमकल की 6 गाड़ियां     |   दिल्ली में आंधी-तूफान का खतरा, IMD का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी     |   'मेरा क्या हाल किया गया, सबने देखा', सोनारपुर में हमले के बाद अभिषेक बनर्जी का BJP पर निशाना     |   ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर हमला     |  

US Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट में युद्धविराम, लेकिन युद्ध की वजह बरकरार

US Iran Ceasefire: कई हफ्तों से बढ़ते संघर्ष के बाद अमेरिका, इजराइल और ईरान दो हफ्ते के लिए अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में ईरान के प्रस्ताव को व्यवहारिक बताया, फिर थोड़ी देर बाद संदेह जताया। इससे लगता है कि मिडिल ईस्ट के हालात अस्थिर हैं।

तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। ये दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 25 फीसदी और एलएनजी का 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। यही वजह है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण और ट्रांजिट फीस चाहता है, जबकि अमेरिका सैन्य निगरानी बनाए रखने की योजना बना रहा है।

इसके अलावा परमाणु हथियार भी अहम मुद्दा है। ईरान का कहना है कि वो यूरेनियम संवर्धन जारी रखेगा। वहीं, वाशिंगटन का कहना है कि ईरान अगर अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखता है तो उसको भारी कीमत चुकानी होगी।

इस बीच, इजराइल इस अस्थाई युद्धविराम का समर्थन कर रहा है। लेकिन उसका कहना है कि वो लेबनान में हिज्बुल्लाह से लड़ना जारी रखेगा। उधर, संयुक्त राष्ट्र संयम बरतने का आग्रह कर रहा है। बहरहाल, ये युद्धविराम फिलहाल गोलीबारी रोकने में कारगार साबित हो सकता है। लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच लड़ाई का मूल कारण अब भी बना हुआ है।