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न्यायालय ने राजमार्गों से आवारा मवेशियों को दूर रखने संबंधी याचिका पर केंद्र, अन्य से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा, जिसमें देशभर में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से आवारा मवेशियों को दूर रखने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

पीठ ने पाया कि कई राज्य 10 प्रतिशत गौ-उपकर तो वसूल रहे हैं लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय पहले ही आवारा कुत्तों के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख चुका है, जिसमें राजमार्गों पर आवारा पशुओं के प्रवेश का मुद्दा भी शामिल है।

याचिकाकर्ता ‘लॉयर्स फॉर ह्यूमैन राइट्स इंटरनेशनल’ की ओर से पेश वकील ने कहा कि अधिकतर मुद्दे आवारा कुत्तों से जुड़े मामले के फैसले में शामिल हो जाएंगे, लेकिन इस याचिका में कुछ अन्य पहलू भी उठाए गए हैं।

पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।

याचिका में अधिकारियों को राजमार्गों पर मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए एक समान राष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनाने और उन्हें लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका में विशेष रूप से दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अनिवार्य रूप से बाड़ लगाने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा, वैज्ञानिक तरीके से संचालित गोशालाओं/पशु आश्रयों की स्थापना के लिए निर्धारित वित्त पोषण सुनिश्चित करने का और मवेशियों को अवैध रूप से छोड़ने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिका में आवारा मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए ‘दोष रहित मुआवजा’ (ऐसा मुआवजा जिसमें यह साबित करने की जरूरत नहीं होती कि गलती किसकी थी) ढांचा तैयार करने की भी अपील की गई है।

उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के स्थानांतरण और नसबंदी से जुड़े पिछले वर्ष सात नवंबर के उसके आदेश में संशोधन का अनुरोध करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

न्यायालय ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में “चिंताजनक वृद्धि” का संज्ञान लेते हुए सात नवंबर 2025 को निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए।

भाषा

गोला अविनाश

अविनाश