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उत्तराखंड में एक बार फिर नए जिलों की मांग को लेकर चर्चा तेज

उत्तराखंड में एक बार फिर नए जिलों की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है।उत्तराखंड अलग राज्य गठन के बाद से ही यहां नए जिलों की मांग उठने लगी थी, 13 जिलों के साथ अस्तित्व में आया था। 15 अगस्त, 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने चार नए जिलों के निर्माण की घोषणा की। इनमें उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री, पौड़ी में कोटद्वार, अल्मोड़ा में रानीखेत और पिथौरागढ़ में डीडीहाट को नया जिला घोषित किया गया। लेकिन कुछ दिनों बाद सीएम पद से हटते ही ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

वर्ष 2012 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में यह हुआ कि नए जिलों की भाजपा सरकार की घोषणा को दरकिनार कर राजस्व परिषद के अंतर्गत पुनर्गठन आयोग बना उसे यह विषय सौंप दिया गया।वर्ष 2016 में हरीश रावत ने बतौर सीएम नए जिलों को लेकर कदम बढ़ाए। उन्होंने एक साथ आठ नए जिलों के निर्माण का इरादा जताया। यह बात अलग है कि तब उन्होंने नए जिलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब पुष्कर सिंह धामी ने अपने दूसरे कार्यकाल में इस बात के संकेत दिए हैं कि नये जिलों की मांग पर कदम आगे बढ़ाया जाएगा। अब भाजपा सरकार में रुड़की, रामनगर, कोटद्वार, काशीपुर और रानीखेत को जिला बनाए जाने पर विचार किए जाने की चर्चा है। भाजपा का कहना हैं कि नए जिलों के विस्तार समय पर होगा।