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मकर संक्रांति पर रंग-बिरंगी पतंगों से सजा मेरठ का बाजार, कीमत 10 से 50 रुपए तक

मेरठ में पतंगों का बाजार सजा हुआ है। बाजार में 10 रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पतंग है। आज मकर संक्रांति पर शहरवासी पतंगबाजी करना बेहद शुभ मानते हैं। यह मनोरंजन का भी एक साधन माना जाता है। ऐसे में रात भर खैरनगर, लिसाड़ी गेट, सदर, पीएल शर्मा रोड से लेकर शारदा रोड और शहर के अन्य बाजारों में पतंगों की बिक्री हुई।

लोगों ने जमकर पतंगें खरीदी।हालांकि चाइनीज मांझे पर बैन के कारण लोगों को सादे मांझे से काम चलाना पड़ रहा है। पतंग विक्रेताओं ने भी दुकानों पर चाइनीज मांझा बैन है कि बैनर टांग लिए हैं। साफ लिखा है कि न चाइनीज मांझा बेचते हैं न इसको प्रमोट करते हैं।

शहर में मकर संक्रांति पर पतंगें उड़ाने का एक चलन है। पतंग विक्रेताओं की मानें तो उनकी चौथी, पांचवीं पीढ़ी मेरठ में पतंगों का कारोबार कर रही है। पतंगबाजी तो नवाबों का शौक रहा है। वहीं से ये चलन चलकर मेरठ तक आया। तबसे लगातार जारी है। 

जहां बाजार में सादी पतंगों के अलावा ताव पतंगें, कैंडल काइट, अमेरिकन पतंग, आई लव माई इंडिया, कॉर्टून, डोरेमोन और सिनेस्टार वाली पतंगें काफी पसंद की जा रही है। वहीं पतंगबाज चरखी भर-भर धागा भी ले रहे हैं।

इसके बाद खैरनगर में पतंग विक्रेता सलमान कहते हैं हमारी चौथी पीढ़ी है जो इस पतंग की दुकान पर बैठकर पतंगें बेच रही है। हम पतंगें बनाते भी हैं। पहले तो मांझा यहीं बच्चा पार्क मेरठ में बनता था। लेकिन अब वो कारखाने नहीं रहे इसलिए बरेली से मांझा मंगाकर बेचते हैं। कहते हैं चाइनीज मांझा बेचना हमने बिल्कुल बंद कर दिया। प्रशासन की सख्ती है साथ ही हादसे भी हो रहे हैं।

सलमान कहते हैं दुकानों पर तो चाइनीज मांझा अब नहीं बिक रहा, पुलिस बहुत सख्त है। लेकिन ऑनलाइन चाइनीज मांझे की बिक्री खूब हो रही है। पुलिस, प्रशासन को वहां भी सख्ती बरतनी होगी। चाइनीज मांझे की ऑनलाइन बिक्री भी बंद कराई जाए। तमाम प्लेटफार्म हैं जिनसे पतंगबाज चाइनीज मांझा मंगाकर पतंगें तना रहे हैं। उससे हादसे हो रहे हैं।

खैरनगर में ही एक अन्य पतंग विक्रेता राशिद ने बताया कि मेरठ में सरकार ने इतनी सख्ती कर दी कि हम लोग चाइनीज मांझा अंडरग्राउंड कर चुके हैं। हम भी ऐसा काम नहीं करना चाहते जो जनता को नुकसान पहुंचाए। हम प्रशासन के साथ हैं। हालांकि चाइनीज मांझा बंद होने से हमारे कारोबार पर बड़ा असर हुआ है। हमारी मुनाफा बहुत घटी है। लेकिन आसपास के जिलों से लोग चाइनीज मांझा खरीदकर ला रहे हैं यहां पतंग उड़ा रहे हैं तो आसपास के जनपदों में भी चाइनीज मांझा बैन होना चाहिए।