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गो आश्रय स्थलों में गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम के निर्देश, चारा संकट से निपटने पर जोर

लखनऊ: योगी सरकार ने बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए प्रदेश के समस्त गो-आश्रय स्थलों में पशुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी गो आश्रय स्थलों पर गर्मी से बचाव के समुचित इंतजाम तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित किए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही से पशुओं को नुकसान न पहुंचे। 

लू से सुरक्षा के लिए वाटर मिस्टिंग सिस्टम व कूलर अनिवार्य
दरअसल, भीषण गर्मी से बचाने के लिए गो आश्रय स्थलों पर वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और पर्याप्त छायादार व्यवस्था अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है, जिससे किसी प्रकार की कमी तुरंत दूर की जा सके।

चारा संकट से निपटने पर विशेष जोर
योगी सरकार ने संभावित चारा संकट को देखते हुए इसके समाधान के लिए भी व्यापक रणनीति अपनाने को कहा है। गो आश्रय स्थलों में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा और भूसा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पशुओं के पोषण में कोई कमी न आए।

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाकर हाइब्रिड नेपियर की बुआई
इस दौरान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। खाली कराई गई भूमि पर हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई करने पर जोर दिया गया है, जिससे लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे। इसके अलावा गो आश्रय स्थलों में छायादार वृक्षों का रोपण किया जा रहा है। जिलाधिकारी जौनपुर द्वारा भूसा दान करने वालों को पुण्य की एफडी प्रमाण पत्र वितरण किया गया है। जिलाधिकारी आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर एवं हरदोई द्वारा गो आश्रय स्थलों में वाटर मिस्टिंग सिस्टम, पंखे, कूलर और फॉगर में विशेष व्यवस्था की गई है।

भूसा दान में 10 जनपद अग्रणी
भूसा दान अभियान को लेकर भी प्रदेश में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। अब तक महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट, गोरखपुर समेत 10 जनपद इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के सहयोग से गो-आश्रय स्थलों को पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार ने अन्य जनपदों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है।