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Gujarat: अमरेली में प्राकृतिक खेती का सफल मॉडल, बिना रासायनिक खाद बढ़ा उत्पादन

Gujarat: गुजरात के अमरेली से खेती का एक ऐसा मॉडल सामने आया है, जो राज्य में प्राकृतिक खेती अभियान को नई दिशा दे सकती है। कॉलेज ऑफ नैचुरल फार्मिंग, गुजरात नैचुरल फार्मिंग साइंस यूनिवर्सिटी, अमरेली के सफल प्रयोग ने साबित कर दिखाया कि बिना रासायनिक खाद के भी उत्पादन में बढ़ोतरी संभव है। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत इस सफल मॉडल का निरीक्षण भी कर चुके हैं।

आमतौर पर तुअर के पौधे की लंबाई करीब 2 मीटर तक होती है। वहीं, अमरेली में जीवामृत के प्रयोग से तुअर के पौधों की लंबाई 4 मीटर और फैलाव करीब 3 मीटर तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, फसल पूरी तरह रोगमुक्त और कीटमुक्त पाई गई।

प्राकृतिक खेती से तुअर के अलावा बाजरा, सूरजमुखी, मूंगफली, सौंफ, तिल, मिर्च, हल्दी, केला और गन्ना जैसी फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खेती पूरी तरह देसी गाय पर आधारित है। जीवामृत बनाने के लिए देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन का इस्तेमाल किया जाता है। खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। इससे किसानों को महंगे उर्वरकों और कीटनाशकों के खर्च से भी छुटकारा मिल जाता है।

ऐसे में केमिकल फ्री गुजरात के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में अमरेली का यह मॉडल एक मजबूत और टिकाऊ पहल बनकर उभर रहा है।