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6-7 साल बाद फिर शुरू हुआ भारत-चीन सीमा व्यापार, शिपकी-ला से 16 व्यापारी तिब्बत रवाना

भारत और चीन के बीच हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकी-ला दर्रे से सीमा व्यापार शनिवार को करीब 6-7 साल बाद फिर शुरू हो गया। इससे सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल है और इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिपकी-ला में व्यापार की शुरुआत की। उन्होंने नामग्या, डब्लिंग और लियो गांवों के 16 स्थानीय व्यापारियों के पहले दल को चीन के कब्जे वाले तिब्बत के लिए रवाना किया। रवाना होने से पहले व्यापारियों को पारंपरिक खाटा (स्कार्फ) पहनाकर सम्मानित किया गया।

व्यापारी अपने साथ गुड़, चावल, चाय, चीनी, कालीन, स्थानीय अनाज, बिस्किट और अन्य सामान लेकर गए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, सभी सुरक्षा जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। व्यापारियों को तय नियमों के अनुसार 72 घंटे के अंदर वापस लौटने के निर्देश दिए गए हैं।इस मौके पर मंत्री ने 1.70 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक ट्रेड मार्ट का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पहले किन्नौर के व्यापारियों को व्यापार के लिए तिब्बत के दूर-दराज इलाकों में जाना पड़ता था। अब शिपकी गांव में बने नए ट्रेड सेंटर से दोनों देशों के व्यापारी एक ही तय जगह पर सामान का लेन-देन कर सकेंगे।

नेगी ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण 2019 से सीमा व्यापार बंद था। इसके दोबारा शुरू होने से सीमावर्ती इलाकों में व्यापार, रोजगार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग को फिर से शुरू कराने में मदद के लिए केंद्र सरकार का भी धन्यवाद किया।

उन्होंने बताया कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), वाणिज्य मंत्रालय और सीमा शुल्क विभाग की तय सूची के अनुसार, भारत से चीन को 36 तरह के सामान भेजने और चीन से भारत में 20 तरह के सामान लाने की अनुमति है। हालांकि इस सूची में घोड़े, भेड़ और बकरियों जैसे जीवित जानवर भी शामिल हैं, लेकिन इस साल इनका व्यापार नहीं होगा। किन्नौर में जानवरों की जांच के लिए क्वारंटीन सेंटर नहीं है। मंत्री ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत क्वारंटीन सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।

कार्यक्रम के दौरान नामग्या गांव की स्थानीय महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। सीमा व्यापार शुरू होने से सीमावर्ती गांवों के लोगों में उत्साह है। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। कार्यक्रम में किन्नौर के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार शर्मा, एडीएम पूह रविंदर ठाकुर, ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।