गुजरात के अहमदाबाद में उत्तरायण पर किराए पर छत देने की परंपरा पुरानी है। इस साल किराए की दर रिकॉर्ड 25 हजार रुपये रोजाना तक पहुंच गई है। रायपुर, ढाल नी पोल और रायपुर चकला जैसे ऐतिहासिक मुहल्लों में किराए के छत की मांग ज्यादा है। वजह है आपस में जोड़ने वाला मकानों का खास डिजाइन, जिसे यहां 'ढाबा' कहते हैं।
घरों की पारंपरिक बनावट पतंग उड़ाने वालों में काफी लोकप्रिय है। वे बेरोकटोक एक छत से दूसरी छत पर जा सकते हैं।
कई मकान मालिक किराए पर छत के साथ खास पैकेज की पेशकश कर रहे हैं। इनमें सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात के खाने अलावा शाम की चाय भी शामिल है।
किराए पर छत लेने का रुझान ना सिर्फ यहां के लोगों में, बल्कि देश भर के गुजराती समुदाय और यहां तक कि प्रवासियों में भी है। किराए पर छत देने वाले एक मकान मालिक हैं, अजय मोदी। उन्होंने पुराने अहमदाबाद में 'टेरेस टूरिज्म' को बढ़ावा देने के लिए खास वेबसाइट बनवाई है।
उत्तरायण पर छत किराए पर देने की परंपरा पुराने अहमदाबाद में मध्यम वर्गीय लोगों के लिए आमदनी का भी जरिया है। त्योहार के मौसम में थोड़ी-बहुत आमदनी उनके चेहरों की मुस्कान बढ़ा देती है। इस साल उत्तरायण का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। ये सर्दियों की समाप्ति और गर्मी की शुरुआत का प्रतीक है। गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में इसे फसलों के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है।